बतरस 2026 के अंतिम दिन सृजन संवाद के मंच पर बच्चों ने दी प्रस्तुति

रायबरेली के मधुकरपुर में बतरस 2026 के अंतिम दिन बच्चों ने ‘भविष्योन्मुखी बतरस’ सत्र में प्रस्तुतियां दीं। आयोजन में अनिरुद्ध भदौरिया के कहानी-संग्रह ‘कलाइयाँ’ का विमोचन, शिक्षा पर परिचर्चा और अमरीक सिंह ‘दीप’ के रचनाकर्म पर सृजन संवाद आयोजित हुआ।

Oct 25, 2026 - 20:50
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बतरस 2026 के अंतिम दिन सृजन संवाद के मंच पर बच्चों ने दी प्रस्तुति

रायबरेली में त्रिदिवसीय साहित्यिक आयोजन का समापन; अमरीक सिंह ‘दीप’ के रचनाकर्म पर हुआ संवाद, कहानी-संग्रह ‘कलाइयाँ’ का विमोचन

रायबरेली, 25 अक्तूबर 2026। प्रतिष्ठित अखिल भारतीय साहित्यिक संस्था ‘बतरस’ द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम के तीसरे और अंतिम दिन मधुकरपुर, रायबरेली में ‘भविष्योन्मुखी बतरस’ का आयोजन किया गया। इस सत्र में बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों से उपस्थित साहित्यप्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में बाल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के साथ-साथ शिक्षा, साहित्य और रचनात्मक लेखन से जुड़े विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

‘भविष्योन्मुखी बतरस’ सत्र में निकिता, संस्कृति, हिमांशु, प्राणिक, चेतना, आराध्य, अम्बास्तु, अनुकृति, अनन्या, अभिनंदन, ओजस एवं आदृजा ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। सत्र का संचालन बतरस परिवार के आराध्य श्रीवास्तव और साँची सिंह ने किया। स्वागत भाषण सुदामा सिंह ने दिया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन ज्योति शुक्ला ने किया।

बदलते दौर में शिक्षा के सवाल पर परिचर्चा

कार्यक्रम के एक प्रमुख सत्र में रमन सिंह ने ‘बदलते दौर में शिक्षा के सवाल’ विषय पर परिचर्चा की। इसमें बदलते सामाजिक परिवेश में शिक्षा की भूमिका और उससे जुड़े प्रश्नों पर विचार-विमर्श किया गया। आयोजन का उद्देश्य साहित्य और संवाद के माध्यम से नई पीढ़ी की रचनात्मकता तथा वैचारिक समझ को प्रोत्साहित करना रहा।

कहानी-संग्रह ‘कलाइयाँ’ का विमोचन

कार्यक्रम के दूसरे सत्र में अनिरुद्ध भदौरिया के कहानी-संग्रह ‘कलाइयाँ’ का विमोचन किया गया। इस अवसर ने समकालीन हिंदी कथा-साहित्य और नए साहित्यिक हस्तक्षेपों पर चर्चा का अवसर प्रदान किया।

अमरीक सिंह ‘दीप’ के रचनाकर्म पर सृजन संवाद

आयोजन का एक महत्वपूर्ण आकर्षण लेखक अमरीक सिंह ‘दीप’ के रचनाकर्म पर केंद्रित ‘सृजन संवाद’ सत्र रहा। इस संवाद में लेखक अमरीक सिंह ‘दीप’ के साथ कथाकार शिवमूर्ति, अदनान बिस्मिल्लाह, आकांक्षा आदित्य, अनीता मिश्र, अनिल सिंह, इंद्रकुमार, आनंद शुक्ल और अहमद खान फारूक ने सहभागिता की। सत्र में साहित्य, सृजन और लेखकीय अनुभवों के संदर्भ में संवादपरक भागीदारी देखने को मिली।

कार्यक्रम का सफल संचालन बतरस के संस्थापक सदस्य डॉ. कृष्ण कुमार श्रीवास्तव ने किया। अतिथियों का स्वागत शिवेंद्र सिंह, शैलेश प्रताप सिंह, अभिषेक सिंह ‘अंकुर’, रमन सिंह, अनुराग शुक्ल, ब्रजेश सिंह तथा बतरस की आयोजन एवं संयोजन समिति के सदस्यों ने किया।

साहित्य और संस्कृति प्रेमियों की रही सहभागिता

इस अवसर पर रमेश सिंह, दिनेश प्रियमन, मुनेश्वर सिंह, राजेश सिंह, कृति बरनवाल, अंकुश, अभिनव, विकास, विनय भदौरिया, सुदामा सिंह, स्वाति सिन्हा, प्रीति श्रीवास्तव, हंसराज, दिलीप श्रीवास्तव, राजकुमार श्रीवास्तव, अरुण कुमार, राकेश यादव और अशोक सिंह सहित बड़ी संख्या में साहित्य एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

बच्चों की रचनात्मक प्रस्तुतियों, पुस्तक-विमोचन और सृजन संवाद के विविध सत्रों के साथ बतरस 2026 का त्रिदिवसीय आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम ने साहित्यिक संवाद, बाल प्रतिभाओं के प्रोत्साहन और रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराया।

 

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I