मंदारमनी और बोगुरन-जलपाई बीच पर गूँजा ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ का संदेश
विद्यासागर विश्वविद्यालय की पहल पर पूर्व मेदिनीपुर के मंदारमनी और बोगुरन-जलपाई समुद्र तट पर ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान आयोजित किया गया। 300 से अधिक छात्रों, ग्रामीणों, मछुआरा समुदाय और सामाजिक संगठनों के सदस्यों ने समुद्र तट की सफाई की और समुद्री पारिस्थितिकी संरक्षण का संदेश दिया।
विद्यासागर विश्वविद्यालय की पहल पर समुद्री तटों की सफाई के साथ समुद्री पारिस्थितिकी संरक्षण और टिकाऊ तटीय जीवनशैली के प्रति लोगों को किया गया जागरूक
पूर्व मेदिनीपुर, 13 सितंबर। समुद्री पारिस्थितिकी के संरक्षण, तटीय क्षेत्रों को स्वच्छ रखने और स्थानीय समुदायों के बीच पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से रविवार को पूर्व मेदिनीपुर जिले के दो प्रमुख समुद्री तटों मंदारमनी के दक्षिण पुरुषोत्तमपुर और बोगुरन-जलपाई बीच पर बड़े पैमाने पर ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ जागरूकता एवं समुद्र तट सफाई अभियान आयोजित किया गया। यह संयुक्त अभियान कोस्टल ऑब्जर्वेटरी एंड आउटरीच सेंटर की पहल पर आयोजित किया गया। केंद्र की स्थापना भारत सरकार के इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज (INCOIS) और विद्यासागर विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल स्टडीज के सहयोग एवं वित्तीय समर्थन से दीघा में की गई है। कार्यक्रम भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत INCOIS के औपचारिक समन्वय में आयोजित हुआ।
दो समुद्री तटों पर एक साथ चला अभियान
अभियान के दौरान दोनों समुद्री तटों पर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, स्थानीय ग्रामीणों, पारंपरिक मछुआरा समुदाय के सदस्यों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। समुद्र तटों पर जमा प्लास्टिक, पैकेजिंग सामग्री और अन्य कचरे को एकत्र कर तटीय क्षेत्र को स्वच्छ बनाने का प्रयास किया गया। इसके साथ ही प्रतिभागियों ने लोगों को समुद्र में कचरा नहीं फेंकने, प्लास्टिक के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने और समुद्री जैव-विविधता को संरक्षित करने के प्रति जागरूक किया। आयोजकों के अनुसार, अभियान में 300 से अधिक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विश्वविद्यालय, सरकार और स्थानीय समुदाय की साझेदारी
कार्यक्रम में विद्यासागर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. जयंत किशोर नंदी मुख्य संरक्षक के रूप में उपस्थित रहे। रामनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. चंद्रशेखर मंडल तथा मुगबेरिया गंगाधर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. स्वपन कुमार मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। अभियान का संचालन सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल स्टडीज के निदेशक एवं कोस्टल ऑब्जर्वेटरी एंड आउटरीच सेंटर के समन्वयक डॉ. जातिशंकर बंद्योपाध्याय के नेतृत्व में किया गया। केंद्रीय स्तर से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के संयुक्त सचिव निवास राव गांगी रेड्डी तथा वैज्ञानिक ई. पट्टाभि राम राव की उपस्थिति ने कार्यक्रम को संस्थागत महत्व प्रदान किया।
शोधार्थियों और शिक्षकों ने भी संभाली जिम्मेदारी
समुद्री एवं तटीय पर्यावरण से संबंधित अकादमिक शोध को जन-जागरूकता से जोड़ने के उद्देश्य से विद्यासागर विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षकों और शोधार्थियों ने भी अभियान में सक्रिय भागीदारी की। ओशन जियोमैटिक्स विद एआई विभाग के डॉ. सौरव माइती तथा रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस विभाग के डॉ. निरूपम आचार्य और डॉ. अमृता कामिला ने अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई। भारत सरकार के INCOIS-MoES द्वारा स्वीकृत परियोजना के अंतर्गत विद्यासागर विश्वविद्यालय के शोधार्थी सौम्यकांति पांडा, मुगबेरिया गंगाधर महाविद्यालय के फैकल्टी स्नेहाशीष मंडल तथा विद्यासागर विश्वविद्यालय के शोधार्थी अविक साहा ने कार्यक्रम के समग्र प्रबंधन एवं संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
छात्रों से लेकर मछुआरा समुदाय तक की भागीदारी
अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी व्यापक जनभागीदारी रही। अलग-अलग स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों के साथ काजला जनकल्याण समिति के सदस्य, स्थानीय ग्रामीण तथा पारंपरिक मछुआरा समुदाय के लोग भी अभियान में शामिल हुए। प्रतिभागियों ने न केवल समुद्र तट की सफाई की, बल्कि समुद्री पर्यावरण को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सामुदायिक भागीदारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया। आयोजकों का मानना है कि समुद्री तटों की स्वच्छता केवल एक दिन के सफाई अभियान से संभव नहीं है। इसके लिए स्थानीय समुदाय, पर्यटक, प्रशासन, शिक्षण संस्थान और शोध संस्थानों को मिलकर लगातार काम करना होगा।
समुद्री अनुसंधान केंद्र के विस्तार की उम्मीद
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं और प्रतिभागियों ने उम्मीद जताई कि दीघा स्थित समुद्री एवं तटीय अनुसंधान केंद्र को भविष्य में व्यापक रूप से विकसित किया जाएगा और यह पूर्वी भारत में समुद्री एवं तटीय अनुसंधान का एक विशिष्ट क्षेत्रीय केंद्र बन सकेगा। इस प्रकार के अभियान अकादमिक शोध को जमीन से जोड़ने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को समुद्री पारिस्थितिकी के महत्व से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ से टिकाऊ भविष्य का संदेश
समुद्र तटों पर आयोजित यह अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से स्वच्छ समुद्र, स्वस्थ समुद्री पारिस्थितिकी और टिकाऊ तटीय जीवनशैली का संदेश भी दिया गया। आयोजकों ने देशव्यापी स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को प्रोत्साहन देने वाले राष्ट्रीय स्तर के अभियानों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने सामूहिक रूप से समुद्र और तटीय पर्यावरण को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का संकल्प दोहराया।
अकादमिक शोध, सरकारी संस्थाओं के सहयोग और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी का यह संगम पूर्वी भारत में समुद्री पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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