हावड़ा में ‘ऋतु-संधि शब्दोत्सव’, कवियों ने किया काव्य-पाठ
हावड़ा के सलकिया स्थित पैरामाउंट सेकेंडरी स्कूल में आयोजित ‘ऋतु-संधि शब्दोत्सव’ में कोलकाता और हावड़ा के लगभग 30 साहित्यकारों ने काव्य-पाठ किया। केवल काव्य परिवार और हिंदी साहित्य अकादमी, कोलकाता संभाग के संयुक्त आयोजन में कविता, प्रकृति और सामाजिक संवेदनाओं की अभिव्यक्ति हुई।
शरद की विदाई और हेमंत की आहट के बीच कोलकाता-हावड़ा के लगभग 30 साहित्यकारों ने काव्य-पाठ से सजाई साहित्यिक संध्या
हावड़ा, 25 अक्तूबर 2026। शरद की उजली विदाई और हेमंत की सुनहरी आहट के बीच रविवार को हावड़ा के सलकिया स्थित पैरामाउंट सेकेंडरी स्कूल में ‘ऋतु-संधि शब्दोत्सव’ के अंतर्गत काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। केवल काव्य परिवार, पश्चिम बंगाल इकाई एवं हिंदी साहित्य अकादमी, कोलकाता संभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस साहित्यिक संध्या में कोलकाता और हावड़ा के लगभग 30 साहित्यकारों, कवियों एवं शब्द-साधकों ने भाग लिया। विविध काव्य-विधाओं और भावभूमियों से सजी प्रस्तुतियों ने प्रकृति, मानवीय संवेदना और सामाजिक सरोकारों को स्वर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्पांजलि के साथ हुआ। इसके बाद प्रणति ठाकुर ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। आयोजन में उपस्थित अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि हावड़ा नगर निगम की पूर्व पार्षद एवं समाजसेवी गीता राय रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने साहित्यकारों का अभिवादन करते हुए आयोजन में आमंत्रित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने साहित्यिक आयोजनों को समाज में संवेदना और सकारात्मकता बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। साथ ही उपस्थित लोगों को शारदीय शुभकामनाएँ देते हुए आगामी दीपावली की बधाई दी।
काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता केवल काव्य परिवार, पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष एवं कवि जयकुमार ‘रुसवा’ ने की। हिंदी साहित्य अकादमी, कोलकाता संभाग की अध्यक्ष चित्रा रॉय ‘श्रीकृष्णवी’ प्रधान अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि अकादमी के कोषाध्यक्ष दयाशंकर मिश्र विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
काव्य-पाठ में विविध भावों की अभिव्यक्ति
काव्य-पाठ के दौरान कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों के अनेक कवियों एवं गीतकारों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। सहभागी रचनाकारों में भारती मिश्रा, राधा गुप्ता, मानस कुमार, ज्योति जैन ‘ज्योति’, आलोक चौधरी, सुरेन्द्र सिंह, नीतू शर्मा, रामाकांत सिन्हा ‘सुजीत’, कृष्ण कुमार दूबे, राम नारायण झा ‘देहाती’, विश्वजीत ठाकुर, प्रदीप कुमार धानुक, प्रणति ठाकुर, नंदलाल ‘रोशन’, संजय शुक्ल, पुनीत अग्रवाल, कमल पुरोहित ‘अपरिचित’, चित्रा रॉय ‘श्रीकृष्णवी’, दयाशंकर मिश्र और जयकुमार ‘रुसवा प्रमुख रहे।
कवियों की प्रस्तुतियों में प्रकृति की कोमलता, जीवन के विविध अनुभवों, मानवीय संबंधों और सामाजिक सरोकारों की अभिव्यक्ति देखने को मिली। ऋतु-परिवर्तन की पृष्ठभूमि में आयोजित इस गोष्ठी ने कविता के माध्यम से संवेदनाओं और विचारों को साझा करने का अवसर प्रदान किया। साहित्यप्रेमियों की सहभागिता ने आयोजन को संवादपरक और आत्मीय स्वरूप दिया।
सामूहिक प्रयास से साकार हुआ आयोजन
कार्यक्रम का संचालन कमल पुरोहित ‘अपरिचित’ ने किया। आयोजन के संयोजन में प्रणति ठाकुर, रामाकांत सिन्हा, पुनीत अग्रवाल और विश्वजीत शर्मा ‘सागर’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कार्यक्रम के समापन पर पुनीत अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने अतिथियों, रचनाकारों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया। ‘ऋतु-संधि शब्दोत्सव’ ने ऋतु-परिवर्तन के इस अवसर को साहित्यिक अभिव्यक्ति और सामूहिक संवाद से जोड़ते हुए कोलकाता-हावड़ा के साहित्यिक परिवेश में कविता के प्रति साझा अनुराग को अभिव्यक्त किया।
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