भारतीय भाषा परिषद में स्त्री साहित्य उत्सव, काव्य पाठ और लोकगीतों से सजा महिला दिवस समारोह
कोलकाता में महिला दिवस पर सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन और भारतीय भाषा परिषद द्वारा स्त्री साहित्य उत्सव आयोजित किया गया। कार्यक्रम में काव्य पाठ, लोकगीत और स्त्री विमर्श पर विचार प्रस्तुत किए गए।
कोलकाता, 8 मार्च। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर कोलकाता की प्रतिष्ठित संस्था सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन और भारतीय भाषा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में ‘स्त्री साहित्य उत्सव’ और प्रीति मिलन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संगीत और संस्कृति के विविध रंग देखने को मिले, जिसमें काव्य पाठ, लोकगीत और काव्य-नृत्य की प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कवियों और कवयित्रियों ने अपने काव्य पाठ से स्त्री जीवन, संवेदना, संघर्ष और सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्ति दी। काव्य पाठ करने वालों में निर्मला तोदी, शिप्रा मिश्रा, सिपाली गुप्ता, नमिता जैन, श्रद्धा टिबरेवाल, वी अरुणा, वीणा रजक, रीमा मजूमदार, संजना जायसवाल, अपराजिता वाल्मीकि, सुकन्या तिवारी, सुष्मिता चौधरी, नेहा राय, निकिता पांडेय, आशा राय, निधि सिंह, राज्यवर्द्धन, अजय पोद्दार, सुशील पांडेय, संजय यादव, पंकज सिंह, प्रमोद महतो, प्रभात पांडेय, आशुतोष राउत और फरहान अजीज प्रमुख रूप से शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त रमाशंकर सिंह, उर्वशी श्रीवास्तव, सूर्य देव रॉय और अरिस्ता प्रकाश ने लोकगीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को सांस्कृतिक ऊँचाई प्रदान की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि आज स्त्रियों की उपस्थिति शिक्षा, रोजगार, राजनीति और व्यापार जैसे क्षेत्रों में पहले की तुलना में काफी बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद समाज में पूर्ण समानता का प्रश्न अब भी कायम है। उन्होंने कहा कि आज भी युद्ध और दंगों जैसे निर्णय स्त्रियों से पूछकर नहीं किए जाते, जो सामाजिक संरचना में असंतुलन को दर्शाता है।
सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संरक्षक रामनिवास द्विवेदी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिला दिवस का अवसर स्त्रियों के बीच नई प्रेरणा और चेतना का संचार करता है। उन्होंने बताया कि हिंदी मेला जैसे आयोजन युवाओं और विद्यार्थियों के बीच साहित्यिक चेतना को सार्थक रूप से फैलाने का कार्य कर रहे हैं।
वहीं मिशन के महासचिव डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि स्त्री विमर्श का प्रश्न केवल एक दिन का विषय नहीं है, बल्कि यह सदियों के संघर्ष और सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि स्त्री साहित्य स्त्रियों की पहचान, अधिकार, स्वीकृति और संवेदना का साहित्य है, जो समाज में समानता और न्याय की चेतना को मजबूत करता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मंच से युवा कवयित्रियों का सशक्त काव्य पाठ भविष्य के प्रति आश्वस्त करता है।
कार्यक्रम का सफल संचालन सुषमा कुमारी, अदिति दुबे और कंचन भगत ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रामनिवास द्विवेदी द्वारा प्रस्तुत किया गया।
इस अवसर पर श्वेतांक सिंह, मानव जायसवाल, आनंद गुप्ता, प्रभात मिश्रा, पद्माकर व्यास, मंटू दास, आदित्य गिरि, रवि अग्रहरि, भोला साहा, राकेश सिंह, रेखा श्रीवास्तव, डॉ. नगेंद्र, सत्यप्रकाश गुप्ता, कार्तिक बासफोर सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में फूलचंद राम, राजेश प्रसाद, मुकेश पंडित, चंदन भगत, सत्यम पांडेय, संतोष केवट, अनिल साह, प्रिया गुप्ता और अनुराधा भगत की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
What's Your Reaction?

