विज्ञान भवन में महिला कुलपतियों का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन, महिला-नेतृत्व वाले विकास पर जोर

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला कुलपतियों का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ। प्रो. नंदिनी साहू ने शिक्षा से रोजगार और उद्यमिता को जोड़ने वाले E2E फ्रेमवर्क पर बल दिया।

Mar 11, 2026 - 01:44
Mar 11, 2026 - 01:59
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विज्ञान भवन में महिला कुलपतियों का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन, महिला-नेतृत्व वाले विकास पर जोर
प्रो. नंदिनी साहू

नई दिल्ली, 8 मार्च। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में महिला कुलपतियों और शिक्षाविदों का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आई महिला कुलपतियों और शिक्षा-विचारकों ने उच्च शिक्षा में महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका, रोजगार सृजन, नवाचार और महिला-नेतृत्व वाले विकास पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन में स्त्री को 'नारी से नारायणी' तक के रूप में देखने की भारतीय सांस्कृतिक अवधारणा को केंद्र में रखते हुए शिक्षा और नेतृत्व के क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल स्थित हिंदी विश्वविद्यालय (हावड़ा) की कुलपति प्रो. नंदिनी साहू विशेष सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि महिलाओं को रोजगार के लिए सशक्त कार्यबल के रूप में तैयार करने हेतु विश्वविद्यालयों को रोजगार की निरंतरता में आने वाली व्यवस्थागत बाधाओं को दूर करना होगा।

उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थानों को महिलाओं के आत्मविश्वास और करियर की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए वापसी कार्यक्रम और पुनःकौशल विकास को बढ़ावा देना चाहिए।

प्रो. साहू ने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल नौकरी तलाशने वाले स्नातकों के बजाय रोजगार सृजनकर्ता तैयार करने पर बल देना चाहिए। इसके लिए वित्तीय शिक्षा, तकनीकी साक्षरता और कौशल आधारित प्रशिक्षण तक पहुंच सुनिश्चित करने वाले तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने विश्वविद्यालय परिसरों में मिश्रित शिक्षण प्रणाली, सुरक्षित परिवहन और बच्चों की देखभाल जैसी संस्थागत सहायता प्रणालियों को लागू करने की आवश्यकता भी रेखांकित की।

अपने वक्तव्य में उन्होंने 'शस्त्र-शास्त्र-कला' की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा में महिलाओं के समग्र विकास के लिए आत्मरक्षा (शस्त्र), ज्ञान व बौद्धिक विकास (शास्त्र) तथा संगीत, नृत्य और ललित कलाओं (कला) को पाठ्यक्रम में समन्वित रूप से शामिल किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने उच्च शिक्षा में महिला नेतृत्व को सशक्त बनाने के लिए 'E2E फ्रेमवर्क' (Education to Employment and Entrepreneurship) को लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महिला सशक्तिकरण से आगे बढ़कर महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में परिवर्तन आवश्यक है।

प्रो. साहू ने यह भी कहा कि देखभाल संबंधी जिम्मेदारियों, आर्थिक चुनौतियों और व्यवस्थागत बाधाओं के कारण उच्च शिक्षा में छात्रों के बीच पढ़ाई छोड़ने की समस्या अभी भी बनी हुई है। विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम की उन कमियों को दूर करना होगा जो व्यावहारिक अनुप्रयोग और रोजगार सृजन से जुड़ी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पातीं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं के सकल नामांकन अनुपात (GER) को बढ़ाने और कौशल आधारित शिक्षा को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए ठोस रणनीतियों की आवश्यकता है।

सम्मेलन में यह निष्कर्ष सामने आया कि यदि उच्च शिक्षा संस्थान शिक्षा, कौशल और उद्यमिता को एकीकृत ढंग से आगे बढ़ाएं, तो महिलाएं न केवल शिक्षा जगत बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास की अग्रणी शक्ति बन सकती हैं।

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पूजा अग्रहरि पूजा अग्रहरि ने 2020 में दैनिक विश्वमित्र से पत्रकारिता की शुरुआत की। युवा शक्ति और जागो देश यूट्यूब चैनलों से जुड़ने के बाद, वर्तमान में पिछले 1 वर्ष से ‘जागो टीवी’ वेब पोर्टल में कंटेंट राइटर हैं। ‘कोई और राकेश श्रीमाल’ पुस्तक की सह-संपादक रही हैं। आपने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, कोलकाता केंद्र से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है।