मेरठ में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम पर ‘आजाद अधिकार सेना’ का आरोप

22 फरवरी 2026 को मेरठ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर आजाद अधिकार सेना ने शिक्षकों की कथित जबरन उपस्थिति और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। संगठन ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।

Feb 22, 2026 - 21:55
Feb 22, 2026 - 21:55
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मेरठ में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम पर ‘आजाद अधिकार सेना’ का आरोप
मेरठ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

शिक्षकों की कथित जबरन उपस्थिति और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग पर उठे सवाल

22 फरवरी 2026 को मेरठ में आयोजित प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के दौरान आजाद अधिकार सेनाने आरोप लगाया है कि जिले के लगभग 12 ब्लॉकों से 2250 शिक्षकों को साप्ताहिक अवकाश के दिन कार्यक्रम स्थल पर बुलाया गया। संगठन का दावा है कि शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने हेतु प्रशासनिक निर्देश जारी किए गए और लगभग 18 बसों सहित अन्य सरकारी संसाधनों का उपयोग किया गया। संगठन ने इस प्रकरण की निष्पक्ष जाँच और जवाबदेही तय करने की माँग की है।

संगठन के आरोप और आपत्तियाँ

आजाद अधिकार सेनाद्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार

  • जिले के लगभग 12 ब्लॉकों से करीब 2250 शिक्षकों को रविवार (साप्ताहिक अवकाश) के दिन कार्यक्रम में बुलाया गया।
  • शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए उच्चाधिकारियों द्वारा निर्देश जारी किए गए।
  • लगभग 18 बसों, कोऑर्डिनेटरों एवं अन्य सरकारी संसाधनों की व्यवस्था की गई।
  • संगठन का आरोप है कि बसों, ईंधन और मानव संसाधनों का उपयोग सरकारी मशीनरी के दुरुपयोगका संकेत देता है।

संगठन का कहना है कि यदि कार्यक्रम सरकारी था, तब भी कर्मचारियों को उनकी इच्छा के विरुद्ध बुलाना अनुचित है। और यदि कार्यक्रम राजनीतिक प्रकृति का था, तो सरकारी संसाधनों का उपयोग और अधिक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

शिक्षकों की भूमिका पर तर्क

संगठन ने कहा कि शिक्षकों का प्राथमिक दायित्व शिक्षा प्रदान करना और राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करना है। उन्हें किसी भी रैली या जनसभा में भीड़ के रूप में प्रस्तुत करना शिक्षा तंत्र की गरिमा के विपरीत है।

यह मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और कर्मचारी सम्मान से जुड़ा बताया गया है।

संगठन की प्रमुख माँगें

1.     कथित रूप से शिक्षकों को जबरन बुलाने से संबंधित आदेशों की निष्पक्ष जाँच।

2.     यदि दबाव डाला गया हो तो उसे तत्काल समाप्त करने की कार्रवाई।

3.     सरकारी संसाधनों के उपयोग की जाँच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना।

4.     पूरे प्रकरण की पारदर्शी जाँच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई। संगठन की ओर से यह बयान देवेंद्र सिंह राणा, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, द्वारा जारी किया गया।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में बड़े विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर प्रशासनिक निष्पक्षता पर बहस तेज होती रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सरकारी कार्यक्रम और राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच स्पष्ट विभाजन सुनिश्चित किया गया था, या नहीं। हालांकि, इस संबंध में प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।

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