लखनऊ न्यायालय में सुनवाई पूरी, अमिताभ ठाकुर मामले में फैसला सुरक्षित
लखनऊ CJM कोर्ट में अमिताभ ठाकुर से जुड़े केस की सुनवाई पूरी। अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा, आजाद अधिकार सेना ने न्यायपालिका पर जताया भरोसा।
18 फरवरी 2026, लखनऊ । लखनऊ स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय में आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर से जुड़े प्रकरण की सुनवाई संपन्न हुई। यह मामला मुकदमा अपराध संख्या 06/2026, थाना गोमतीनगर विस्तार, जनपद लखनऊ से संबंधित है।
सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से विस्तृत कानूनी बहस प्रस्तुत की गई। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता दीपक कुमार ने न्यायालय के समक्ष अपने मुवक्किल का पक्ष रखते हुए तथ्यों, कानूनी प्रावधानों और प्रक्रियात्मक पहलुओं पर आधारित तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने न्यायालय को अवगत कराया कि आरोप तथ्यहीन और राजनीतिक पृष्ठभूमि से प्रेरित हैं।
अभियोजन पक्ष ने भी अपने तर्क रखते हुए आरोपों को गंभीर बताया और उपलब्ध साक्ष्यों का हवाला दिया। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यानपूर्वक सुना और परीक्षण के उपरांत आदेश सुरक्षित रख लिया। निर्णय की तिथि शीघ्र घोषित किए जाने की संभावना है।
संगठन की आधिकारिक प्रतिक्रिया
आजाद अधिकार सेना की ओर से जारी प्रेस बयान में राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेंद्र सिंह राणा ने कहा कि यह प्रकरण राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि संगठन भारतीय न्यायपालिका की निष्पक्षता, संवैधानिक मूल्यों और विधि के शासन पर पूर्ण विश्वास रखता है। राणा ने कहा, “अमिताभ ठाकुर जी का सार्वजनिक जीवन सदैव भ्रष्टाचार, माफिया तंत्र, सत्ता के दुरुपयोग और प्रशासनिक अन्याय के विरुद्ध संघर्ष से जुड़ा रहा है। वर्तमान प्रकरण उसी संघर्ष की एक कड़ी है।” संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि वह न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करता है और अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा है।
कानूनी परिप्रेक्ष्य
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय द्वारा फैसला सुरक्षित रखना यह दर्शाता है कि मामले में प्रस्तुत तर्कों और साक्ष्यों पर गहन विचार किया जा रहा है। आपराधिक न्याय प्रणाली में यह एक सामान्य प्रक्रिया है, जहां विस्तृत बहस के बाद न्यायालय आदेश सुरक्षित रखकर लिखित निर्णय तैयार करता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में अदालत द्वारा आदेश सुरक्षित रखना यह संकेत देता है कि प्रस्तुत तथ्यों और विधिक बिंदुओं का गंभीर परीक्षण आवश्यक है।
राजनीतिक विमर्श में महत्व
पूर्व आईपीएस अधिकारी रहे अमिताभ ठाकुर पिछले वर्षों में कई संवेदनशील मुद्दों पर मुखर रहे हैं। उनके खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर समय-समय पर राजनीतिक बहस भी होती रही है। ऐसे में यह सुनवाई केवल एक न्यायिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक विमर्श का हिस्सा भी बन गई है। हालांकि अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा घोषित किया जाना शेष है, इसलिए सभी पक्ष संयमित प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
समर्थकों से अपील
आजाद अधिकार सेना ने अपने सभी कार्यकर्ताओं, समर्थकों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे न्याय, संविधान और जन-अधिकारों की रक्षा के प्रति सजग रहें तथा न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखें।
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