विद्यासागर विश्वविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान के तहत लैंगिक समानता पर जागरूकता कार्यक्रम

विद्यासागर विश्वविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान 2026 के अंतर्गत स्त्री अध्ययन केंद्र ने लैंगिक समानता पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। ‘स्त्रियों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए अनुकरणीय संकल्प’ विषय पर विशेषज्ञों ने ईश्वरचंद्र विद्यासागर के सामाजिक विचारों को समकालीन संदर्भ से जोड़ा।

Oct 6, 2026 - 21:46
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विद्यासागर विश्वविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान के तहत लैंगिक समानता पर जागरूकता कार्यक्रम
विद्यासागर विश्वविद्यालय में सेवा संकल्प अभियान

 ‘स्त्रियों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए अनुकरणीय संकल्प’ विषय पर विद्यासागर की सामाजिक सेवा और समकालीन संदर्भों पर हुई चर्चा

मिदनापुर, 6 अक्तूबर। ईश्वरचंद्र विद्यासागर के नाम पर स्थापित विद्यासागर विश्वविद्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के प्रति समर्पित सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में चल रहे ‘सेवा संकल्प अभियान, 2026’ के अंतर्गत स्त्री अध्ययन केंद्र की ओर से लैंगिक समानता पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

विश्वविद्यालय के सिस्टर निवेदिता सभागार में शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को लक्षित करते हुए आयोजित कार्यक्रम का विषय ‘स्त्रियों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए अनुकरणीय संकल्प: विद्यासागर की समर्पित सामाजिक सेवा’ रहा।

कार्यक्रम का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दीपक कुमार कर ने किया। उन्होंने ऐसे शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के महत्व पर जोर दिया, जिसमें छात्राएँ लैंगिक समानता के अपने मौलिक अधिकारों का उपयोग कर सकें और स्वयं को ईश्वरचंद्र विद्यासागर के सामाजिक दृष्टिकोण एवं उनके मिशन से जोड़ सकें। उद्घाटन सत्र में कला एवं वाणिज्य में स्नातकोत्तर अध्ययन के संकाय परिषद के संकायाध्यक्ष प्रो. अरिंदम गुप्ता तथा कुलसचिव डॉ. जयंत किशोर नंदी की गरिमामयी उपस्थिति रही।

विद्यासागर के सामाजिक विचारों का समकालीन संदर्भ

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के साहित्य एवं भाषा से जुड़े विभिन्न विभागों के विषय विशेषज्ञों ने व्याख्यान प्रस्तुत किए। इनमें प्रोफेसर मोनांजली बंद्योपाध्याय (बांग्ला विभाग), प्रोफेसर इंद्रनील आचार्य (अंग्रेजी साहित्य, भाषा एवं सांस्कृतिक अध्ययन विभाग), डॉ. संजय जायसवाल, एसोसिएट प्रोफेसर (हिंदी विभाग), डॉ. दुली हेम्ब्रम, एसोसिएट प्रोफेसर (संताली विभाग) तथा सुश्री श्वेता बसाक चक्रवर्ती, असिस्टेंट प्रोफेसर (संस्कृत विभाग) शामिल रहीं।

वक्ताओं ने अपने व्याख्यानों के माध्यम से ईश्वरचंद्र विद्यासागर के जीवन, उनके सामाजिक सरोकारों और लैंगिक समानता के प्रति उनके दृष्टिकोण के विभिन्न पहलुओं को सामने रखा। साथ ही इन विचारों को वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों तथा सेवा संकल्प अभियान के व्यापक संदर्भ से जोड़ते हुए विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को सामाजिक संवेदनशीलता और समानता के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम का संयोजन स्त्री अध्ययन केंद्र की समन्वयक प्रो. जॉली दास ने किया। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों और शोधार्थियों के बीच लैंगिक समानता, महिलाओं की गरिमा तथा सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया। आयोजन ने ईश्वरचंद्र विद्यासागर की सामाजिक सेवा और सुधारवादी दृष्टि को वर्तमान समय के संदर्भ में समझने के लिए एक सार्थक अकादमिक मंच प्रदान किया।

 

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I