विधि शिक्षा की सुलभता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयागराज में राष्ट्रीय कन्वेंशन

प्रयागराज में एआईडीएसओ की पहल पर विधि छात्रों का राष्ट्रीय कन्वेंशन आयोजित हुआ। 22 राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने विधि शिक्षा की बढ़ती फीस, गुणवत्ता, रोजगार, छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप और विधिक पेशे की नैतिकता समेत लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। जस्टिस चेलमेश्वर, प्रशांत भूषण और अन्य वक्ताओं ने विधिक शिक्षा एवं न्याय व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

Oct 5, 2026 - 08:53
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विधि शिक्षा की सुलभता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयागराज में राष्ट्रीय कन्वेंशन
लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए प्रयागराज में राष्ट्रीय कन्वेंशन

22 राज्यों से पहुँचे विधि के छात्र प्रतिनिधि, प्रशांत भूषण और जस्टिस चेलमेश्वर ने किया संबोधित

प्रयागराज, 4 अक्तूबर 2026। विधि की शिक्षा को सर्वसुलभ एवं सस्ती बनाने, विधिक पेशे की नैतिक गरिमा बहाल करने तथा लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर रविवार को प्रयागराज के अलोपीबाग स्थित सरदार पटेल सेवा संस्थान में विधि छात्रों का राष्ट्रीय कन्वेंशन आयोजित किया गया। छात्र संगठन एआईडीएसओ (AIDSO) की पहल पर आयोजित इस कन्वेंशन में देश के 22 राज्यों से विधि के छात्र प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिवक्ता, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक भी उपस्थित रहे।

कन्वेंशन के लिए शहर के गणमान्य नागरिकों और अधिवक्ताओं को शामिल करते हुए स्वागत समिति गठित की गई थी। स्वागत समिति के अध्यक्ष विनोद तिवारी ने महापुरुषों के विचारों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद ‘मैं नहीं मानता’ गीत प्रस्तुत किया गया। स्वागत समिति के सचिव एवं अधिवक्ता राजवेंद्र सिंह ने उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद जैसे ऐतिहासिक शहर में देशभर के विधि छात्रों का राष्ट्रीय कन्वेंशन आयोजित होना महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विधि शिक्षा और न्याय व्यवस्था से जुड़े सवालों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया।

विधि शिक्षा महँगी और गुणवत्ता में गिरावट चिंताजनक : जस्टिस चेलमेश्वर

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि विधि की शिक्षा लगातार महँगी होती जा रही है, जबकि उसकी गुणवत्ता में गिरावट दिखाई दे रही है। उन्होंने विधिक नैतिकता और मूल्यों में कमी को भी चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि एक समय विधि का पेशा समाज में आदर्श और प्रतिष्ठित पेशे के रूप में देखा जाता था, लेकिन भ्रष्टाचार तथा अनैतिक साधनों के बढ़ते इस्तेमाल ने इसकी गरिमा को प्रभावित किया है। उन्होंने न्याय व्यवस्था में लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा की आवश्यकता पर भी बल दिया।

लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जरूरी : प्रशांत भूषण

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि वर्तमान समय में लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के सवाल गंभीर हैं और सभी नागरिकों को अपने लोकतांत्रिक अधिकार प्राप्त होने चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में सहिष्णुता बनाए रखने के लिए धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि आवाज उठाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। ऐसे समय में नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जरूरी है। उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति सहित विभिन्न संवैधानिक संस्थाओं में नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का भी उल्लेख किया।

प्रशांत भूषण ने एसआईआर (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया को लेकर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि इसके कारण बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंका है। उन्होंने नौजवान अधिवक्ताओं और विधि छात्रों से विधिक नैतिकता तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।

संवैधानिक अधिकारों के लिए आंदोलन की जरूरत : द्वारकानाथ रथ

मानवाधिकार संगठन सीपीडीआरएस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष द्वारकानाथ रथ ने कहा कि यह सकारात्मक संकेत है कि छात्र और युवा आंदोलन की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जनांदोलन को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में देशभर के अमन पसंद और लोकतांत्रिक सोच रखने वाले लोगों को एकजुट होना जरूरी है।

विधिक शिक्षा का संकट न्याय व्यवस्था से भी जुड़ा : शिवशीष प्रहराज

एआईडीएसओ के राष्ट्रीय महासचिव शिवशीष प्रहराज ने कहा कि विधिक शिक्षा का संकट केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध देश की न्याय व्यवस्था से भी है। उन्होंने देश की अदालतों में लंबित मामलों की बड़ी संख्या का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थिति में ऐसी कानूनी शिक्षा की आवश्यकता है, जो छात्रों को केवल रोजगार के लिए तैयार न करे, बल्कि उन्हें लोकतांत्रिक अधिकारों, धर्मनिरपेक्षता और पेशेवर नैतिकता के प्रति भी संवेदनशील बनाए। कन्वेंशन में विधि छात्रों की शिक्षा, फीस, रोजगार, छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप, आधारभूत सुविधाओं तथा कानूनी पेशे में बढ़ती असमानता सहित विधिक शिक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

दूसरे सत्र में प्रस्तावों पर व्यापक चर्चा

कन्वेंशन के दूसरे सत्र में देश के 22 राज्यों से आए विधि छात्र प्रतिनिधियों ने विधि शिक्षा के गिरते स्तर और कानूनी पेशे की घटती गरिमा से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में प्रस्तुत प्रस्तावों पर अपने विचार रखे। व्यापक चर्चा के बाद प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित किया गया। कन्वेंशन में विधि छात्रों के सवालों के साथ-साथ जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन को व्यापक बनाने तथा अधिवक्ताओं से जनसरोकार के सवालों पर जनता के साथ खड़े होने का आह्वान किया गया। कन्वेंशन की अध्यक्षता एआईडीएसओ की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अधिवक्ता रिम्मी बघेला ने की। कार्यक्रम में स्वागत समिति के सलाहकार एवं अन्य सामाजिक, राजनीतिक, साहित्यिक और विधिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी सहभागिता की।

कार्यक्रम में श्याम कृष्ण पांडे, पूर्व सांसद धर्मराज पटेल, प्रो. हेरम्ब चतुर्वेदी, प्रो. अनीता गोपेश, हरिश्चंद्र द्विवेदी, डॉ. सईद, पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह, ऋषेश्वर उपाध्याय, मो. सईद सिद्दीकी, लेखक सुरेंद्र राही, राजकुमार, शिवसेवक सिंह, आनंद घिल्डियाल, वरिष्ठ अधिवक्ता सर्वेश, हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह, संयुक्त सचिव कपिल देव यादव, वहाज सिद्दीकी, अंशु मालवीय, उत्पल शुक्ला, आनंद मालवीय, खुर्शीद अनवर, आर.के. राय, हिमांशु रंजन, त्रिलोकी, बिपिन बिहारी, फूल सिंह, रामयश, एम.एल. यादव, विकास तिवारी, एन.एल. गुप्ता, सुनील पासवान, विनोद, शमशुल इस्लाम, सपन चटर्जी, एल.के. अहिरवार, अविनाश मिश्रा, आर.के. गौतम, राकेश प्रसाद, अरुण कुमार, जे.पी. राव, फैज अहमद, हृदेश यादव, अशोक कुमार यादव, सीमा आजाद, राकेश कुमार, श्याम कृष्ण गुप्त, रामसुमेर, जुबैर, एस.डी. शर्मा, चार्ली प्रकाश, बी.के. सिंह, विकास कुमार मौर्य, रज्जन सिंह यादव और गौरव सिंह यादव सहित बड़ी संख्या में हाई कोर्ट के अधिवक्ता एवं नागरिक उपस्थित रहे।

कन्वेंशन का समापन सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण विधिक शिक्षा के लिए संघर्ष को आगे बढ़ाने तथा न्याय व्यवस्था, विधिक नैतिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े सवालों पर देशव्यापी विमर्श एवं अभियान को मजबूत करने के संकल्प के साथ हुआ।

 

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I