सुल्तानपुर में पुलिस पर गंभीर आरोप: CJM के आदेश से SI समेत 4 पर लूट, मारपीट और धमकी का मुकदमा दर्ज
सुल्तानपुर में CJM कोर्ट के आदेश पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ लूट, मारपीट और धमकी का मुकदमा दर्ज। ई-रिक्शा चालक की शिकायत से खुला मामला।
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानून-व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। एक साधारण ई-रिक्शा चालक की शिकायत पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के हस्तक्षेप के बाद पुलिस के ही चार कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना इस बात का संकेत है कि न्याय की उम्मीद अभी भी न्यायालय से जुड़ी हुई है, भले ही स्थानीय स्तर पर सुनवाई न हो।
घटना की शुरुआत
पीड़ित आकाश तिवारी, जो कि चौक घंटाघर क्षेत्र का निवासी है, के अनुसार 13 मार्च 2025 की रात लगभग 10:30 बजे वह अपने ई-रिक्शा से कुड़वार नाका के पास गुजर रहा था।
कोतवाली ले जाकर कार्रवाई
पीड़ित का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसे कोतवाली नगर थाने ले जाने के लिए मजबूर किया। वहाँ पहुँचने के बाद उससे ₹2500 नकद राशि जमा करवाई गई। उसका मोबाइल फोन भी ले लिया गया। उसे यह आश्वासन दिया गया कि अगली सुबह वह अपना सामान वापस ले सकता है।
अगले दिन का घटनाक्रम
14 मार्च 2025 को जब आकाश तिवारी अपना सामान लेने कोतवाली पहुँचा, तो उसे बताया गया कि उसका पैसा और मोबाइल दीवान संजय सोनकर के पास है। जब उसने अपना सामान वापस माँगा, तो पुलिसकर्मियों ने कथित रूप से उसके साथ मारपीट की। उसे धमकी दी गई कि यदि उसने ज्यादा विरोध किया तो उसे झूठे मुकदमे में फँसा दिया जाएगा
आरोपी पुलिसकर्मी
इस मामले में जिन पुलिसकर्मियों पर आरोप लगे हैं, उनमें एसआई शिवानंद यादव (तत्कालीन घंटाघर चौकी प्रभारी), दीवान संजय सोनकर, दो अन्य अज्ञात पुलिसकर्मी शामिल हैं। यह आरोप केवल व्यक्तिगत दुराचार नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग और वर्दी के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण माना जा रहा है।
न्यायालय का हस्तक्षेप
जब पीड़ित की शिकायत स्थानीय पुलिस स्तर पर नहीं सुनी गई, तब उसने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
संभावित धाराएँ
मामले की प्रकृति को देखते हुए निम्न धाराएँ लागू हो सकती हैं- लूट: ₹2500 और मोबाइल जबरन लेना, मारपीट: पीड़ित के साथ शारीरिक हिंसा, आपराधिक धमकी: झूठे केस में फँसाने की धमकी, गाली-गलौज (Intentional Insult): अपमानजनक व्यवहार।
वर्तमान स्थिति
- CJM के आदेश पर FIR दर्ज हो चुकी है।
- मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है।
- आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच की संभावना।
- सस्पेंशन या लाइन हाजिर जैसी कार्रवाई जांच रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
व्यापक प्रभाव
यह मामला केवल एक व्यक्ति के साथ अन्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस जवाबदेही, आम नागरिक की सुरक्षा, न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता जैसे महत्वपूर्ण सवालों को सामने लाता है। खास बात यह है कि अगर पीड़ित न्यायालय न जाता, तो संभवतः यह मामला दबा दिया जाता, जो हमारी व्यवस्था की एक कड़वी सच्चाई को उजागर करता है।
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