राजा नरेंद्र लाल खान वूमेंस कॉलेज में बसंतोत्सव का भव्य आयोजन
गोप, पश्चिम मिदनापुर में 27 फरवरी 2026 को बसंतोत्सव धूमधाम से मनाया गया। दीप प्रज्वलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पौशाली बैनर्जी की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
राजा नरेंद्र लाल खान वूमेंस कॉलेज (स्वायत्त) में 27 फरवरी 2026 को बसंतोत्सव का भव्य और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध आयोजन किया गया। पश्चिम मिदनापुर के गोप स्थित इस प्रतिष्ठित महाविद्यालय का परिसर सुबह से ही रंग-बिरंगे फूलों, अलंकरणों और पारंपरिक सजावट से सुसज्जित था। वातावरण में बसंत की मृदुलता और युवा ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
दीप प्रज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन प्राचार्या डॉ. सपना घोड़ाई द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। सरस्वती वंदना की मंगलमय प्रस्तुति ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आधार प्रदान किया। छात्राओं की सामूहिक प्रस्तुति में अनुशासन, सौंदर्य और भारतीय परंपरा का सुंदर समन्वय दिखाई दिया।
पीले परिधानों में सजा बसंत
बसंतोत्सव का सबसे आकर्षक दृश्य था। पीले वस्त्रों में सजी छात्राओं का उत्साह। पीला रंग बसंत का प्रतीक माना जाता है, और पूरे परिसर में यही रंग एकता और उल्लास का भाव प्रकट कर रहा था। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा महाविद्यालय सरसों के खेतों की तरह खिल उठा हो।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बाँधा समा
कार्यक्रम के दौरान नृत्य, गीत, कविता-पाठ और नाटक की विविध प्रस्तुतियाँ हुईं। समूह नृत्य और लोकगीत ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया। पारंपरिक बंगाली लोकधुनों पर आधारित प्रस्तुतियों ने स्थानीय संस्कृति की जड़ों को जीवंत कर दिया। छात्राओं की सृजनात्मकता और मंचीय आत्मविश्वास ने यह सिद्ध किया कि शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक विकास भी इस संस्थान की प्राथमिकता है।
विशेष आकर्षण: पौशाली बैनर्जी और बैंड की प्रस्तुति
कार्यक्रम का चरम बिंदु रहा बंगाल की प्रसिद्ध लोक गायिका पौशाली बैनर्जी एवं उनके बैंड समूह का सजीव प्रदर्शन। उनके मधुर और ऊर्जावान लोकगीतों ने पूरे परिसर को झूमने पर मजबूर कर दिया। छात्राएँ और शिक्षिकाएँ समान रूप से इस प्रस्तुति का आनंद लेती नजर आईं।
लोकसंगीत की गूंज और तालियों की गड़गड़ाहट ने बसंतोत्सव को यादगार बना दिया।
सांस्कृतिक एकता का संदेश
बसंतोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में आपसी प्रेम, सहयोग और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने का माध्यम बना। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और परंपराओं के संरक्षण का भी साधन है।
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