हिंदी विश्वविद्यालय की संगोष्ठी में व्यवहार कौशल पर गंभीर विमर्श
हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल द्वारा आयोजित संगोष्ठी में व्यवहार कौशल और करियर विकास पर गंभीर चर्चा हुई। IGNOU की प्रो. डॉ. अनुप्रिया पांडेय ने जोहरी विंडो मॉडल सहित अनेक उदाहरणों से आत्म-जागरूकता और सॉफ्ट स्किल्स के महत्व को स्पष्ट किया।
पश्चिम बंगाल के हिंदी विश्वविद्यालय के ट्रेनिंग, प्लेसमेंट एंड स्टूडेंट वेलफेयर सेल द्वारा पहली बार आयोजित एक-दिवसीय ऑनलाइन संगोष्ठी ने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व-विकास और पेशेवर तैयारी के नए आयामों को रेखांकित किया। “अमूर्त क्षमता को आकार देना: कैरियर और जीवन के लिए व्यवहार कौशल” विषय पर केंद्रित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर छिपी संभावनाओं को दिशा देने का सार्थक प्रयास सिद्ध हुआ।
उद्योग की बदलती अपेक्षाएँ और व्यवहार कौशल
संगोष्ठी की विशिष्ट वक्ता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) के School of Management Studies की प्रोफेसर डॉ. अनुप्रिया पांडेय ने अपने सशक्त एवं प्रेरक वक्तव्य में स्पष्ट किया कि आज का औद्योगिक परिदृश्य अत्यंत गतिशील है। तकनीकी दक्षता अब सफलता का एकमात्र मापदंड नहीं रही।
उन्होंने कहा कि “तकनीकी कौशल से साक्षात्कार तो प्राप्त हो सकता है, परंतु स्थायी और संतोषजनक रोजगार व्यवहार कौशल के बिना संभव नहीं।”
डॉ. पांडेय ने बताया कि उद्योग जगत ऐसे व्यक्तियों की तलाश में रहता है जिनमें
- प्रभावी संचार क्षमता
- सहानुभूति और भावनात्मक बुद्धिमत्ता
- टीमवर्क की भावना
- नेतृत्व और समस्या-समाधान की क्षमता
- अनुकूलनशीलता और सकारात्मक दृष्टिकोण जैसे गुण विद्यमान हों।
जोहरी विंडो मॉडल से आत्म-जागरूकता की समझ
अपने व्याख्यान को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए उन्होंने अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जोसेफ लुफ्ट और हैरिंगटन इंगम द्वारा विकसित जोहरी विंडो मॉडल का उल्लेख किया। इस मॉडल के माध्यम से उन्होंने आत्म-जागरूकता के चार आयामों
- खुला क्षेत्र (Open Area)
- अंधा क्षेत्र (Blind Area)
- छिपा क्षेत्र (Hidden Area)
- अज्ञात क्षेत्र (Unknown Area)
को सरल उदाहरणों के साथ स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति का विकास तभी संभव है जब वह स्वयं को पहचानने के साथ-साथ दूसरों से प्राप्त प्रतिक्रिया को भी स्वीकार करे।
कुलपति का दूरदर्शी संबोधन
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू ने अपने विचारों में संस्थागत जड़ता और नवाचार के प्रश्न को उठाया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक संस्थान अक्सर पुराने अनुभवों और कठोर अनुशासन पर आधारित ढांचे में बंधे रहते हैं, जिससे रचनात्मकता और आधुनिक दृष्टि बाधित होती है।
उन्होंने घोषणा की कि विश्वविद्यालय शीघ्र ही ऑफलाइन कौशल-वर्धन कार्यक्रमों की एक श्रृंखला प्रारंभ करेगा, जिससे छात्रों को केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि दक्ष और संवेदनशील पेशेवर के रूप में तैयार किया जा सके।
व्यापक सहभागिता और उत्साह
संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के शिक्षकगण डॉ. जे. के. भारती, डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी, डॉ. के. एन. भारती, काजरी दास, मधुबनती गांगुली, अमन, राज सहित अनेक विद्यार्थी उपस्थित रहे। अन्य विद्यालय के शिक्षक विनोद यादव भी कार्यक्रम से जुड़े।
प्रतिभागियों ने प्रश्नोत्तर सत्र में सक्रिय सहभागिता करते हुए व्यवहार कौशल के व्यावहारिक पक्षों पर चर्चा की। विद्यार्थियों ने स्वीकार किया कि इस संगोष्ठी ने उन्हें आत्ममूल्यांकन और पेशेवर तैयारी के प्रति अधिक सजग बनाया।
सफल समापन
कार्यक्रम का संचालन और समापन ट्रेनिंग, प्लेसमेंट एंड स्टूडेंट वेलफेयर सेल के संयोजक डॉ. इंद्रजीत यादव ने कुशलतापूर्वक किया। उन्होंने सभी वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल विश्वविद्यालय के लिए एक नई शुरुआत है।
यह संगोष्ठी केवल कैरियर उन्मुख संवाद नहीं थी, बल्कि जीवन कौशल और व्यक्तित्व-विकास की दिशा में एक गंभीर शैक्षणिक हस्तक्षेप थी। व्यवहार कौशल को मानव संसाधन विकास का मूल तत्व बताते हुए इस कार्यक्रम ने स्पष्ट किया कि अमूर्त क्षमताओं को यदि सही दिशा और प्रशिक्षण मिले, तो वे व्यक्ति के जीवन और समाज दोनों को नई ऊर्जा प्रदान कर सकती हैं।
What's Your Reaction?

