बुलंदशहर में दलित मनरेगा मजदूरों की मजदूरी रोकी गई, 25% कमीशन माँगने का आरोप
ऊँचागाँव ब्लॉक में दो माह से लंबित मनरेगा मजदूरी पर विवाद। तकनीकी सहायक पर 25% कमीशन माँगने का आरोप। आजाद अधिकार सेना ने होली से पहले DM कार्यालय पर धरने की चेतावनी दी।
बुलंदशहर जनपद में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। विकास खंड ऊँचागाँव के ग्राम रघुनाथपुर और ग्राम भदौरा के दर्जनों मजदूरों ने आरोप लगाया है कि उनकी लगभग दो माह की मजदूरी जानबूझकर रोकी गई है। मामला तब और गंभीर हो गया जब यह आरोप सामने आया कि मेजरमेंट बुक (MB) पास करने के नाम पर 25 प्रतिशत कमीशन की माँग की गई।
आरोप क्या हैं?
प्राप्त शिकायतों के अनुसार, ब्लॉक स्तर पर संविदा पर कार्यरत तकनीकी सहायक समय सिंह पर आरोप है कि उन्होंने मजदूरों से कहा कि बिना “प्रक्रियागत सहयोग” के मेजरमेंट बुक पास नहीं होगी। मजदूरों का आरोप है कि यह “प्रक्रियागत सहयोग” दरअसल मजदूरी का 25 प्रतिशत हिस्सा देने की माँग थी। मजदूरों ने कथित रूप से रिश्वत देने से इंकार कर दिया। इसके बाद उनकी मजदूरी का भुगतान रोक दिया गया। प्रभावित श्रमिकों में रतनपाल सिंह, मूलचंद, पुष्पा, मुन्नी, राजकुमार, मोहित, विजेंद्री, सुखदेव, शेर सिंह, रेखा, अशोक कुमार और सतीश सहित अन्य शामिल हैं। इनमें अधिकांश दलित एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से संबंधित बताए जा रहे हैं।
कानूनी प्रावधान और उल्लंघन
यह पूरा मामला महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के प्रावधानों के सीधे उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।
मनरेगा अधिनियम के अनुसार:
- कार्य पूर्ण होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान अनिवार्य है।
- भुगतान में देरी होने पर प्रतिदिन 0.05% की दर से मुआवजा देय होता है।
- किसी भी प्रकार की अवैध कटौती या कमीशन की माँग दंडनीय अपराध है।
यदि कमीशन माँगने के आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी दर्ज किया जा सकता है।
होली से पहले आर्थिक संकट
होली जैसे प्रमुख त्योहार से ठीक पहले मजदूरी का भुगतान न होना मजदूर परिवारों के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में त्योहारों का विशेष महत्व होता है - रंग, कपड़े, राशन और बच्चों की जरूरतें इन्हीं मजदूरी पर निर्भर करती हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे पहले ही कर्ज लेकर घर चला रहे हैं। यदि समय रहते भुगतान नहीं हुआ, तो त्योहार पर उनके घरों में रंग और मिठास की जगह चिंता और निराशा होगी।
संगठन की प्रतिक्रिया
इस पूरे प्रकरण पर आजाद अधिकार सेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठन के राष्ट्रीय संगठन मंत्री देवेन्द्र सिंह राणा ने कहा कि यह केवल मजदूरी का मामला नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार का प्रश्न है।
संगठन ने प्रशासन से निम्नलिखित माँगें की हैं:
1. तकनीकी सहायक के विरुद्ध तत्काल निष्पक्ष विभागीय जांच।
2. आवश्यकता पड़ने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत एफआईआर।
3. सभी मजदूरों की लंबित मजदूरी बिना कटौती तत्काल जारी की जाए।
4. विलंबित भुगतान पर नियमानुसार मुआवजा।
5. ब्लॉक एवं जिला स्तर पर पारदर्शी निगरानी तंत्र की स्थापना।
संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि होली से पहले मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया, तो मजदूरों के साथ मिलकर जिलाधिकारी, बुलंदशहर कार्यालय पर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रशासन की भूमिका और आगे की राह
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल एक ब्लॉक का मामला नहीं रहेगा, बल्कि मनरेगा के क्रियान्वयन पर व्यापक प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मनरेगा जैसी योजना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को न्यूनतम आय सुरक्षा देना है। यदि जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार या अवैध वसूली होती है, तो योजना की आत्मा ही आहत होती है।
बुलंदशहर का यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता, सामाजिक न्याय और श्रमिक अधिकारों की कसौटी बन चुका है। होली से पहले यदि मजदूरी का भुगतान और जांच की प्रक्रिया शुरू होती है, तो यह विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। अन्यथा, धरना-प्रदर्शन के जरिए यह मुद्दा व्यापक राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का रूप ले सकता है। यह संघर्ष केवल धनराशि का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है, जो सरकार और गरीब श्रमिकों के बीच कायम रहना चाहिए।
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