भारतीय भाषा परिषद में नागार्जुन जयंती पर 'कवि पर्व' एवं साहित्य संवाद का आयोजन
कोलकाता में भारतीय भाषा परिषद में नागार्जुन जयंती के अवसर पर साहित्य संवाद आयोजित हुआ। डॉ. शंभुनाथ ने कहा, "कवि अंधेरे में जुगनू की तरह हैं।" कार्यक्रम में युवा कवियों ने काव्य पाठ किया।
कवि अंधेरे में जुगनू की तरह हैं : डॉ. शंभुनाथ
कोलकाता, 27 जून। भारतीय भाषा परिषद एवं सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संयुक्त तत्वावधान में नागार्जुन जयंती के अवसर पर 'कवि पर्व' के अंतर्गत साहित्य संवाद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों, कवियों एवं साहित्यप्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का स्वागत वक्तव्य देते हुए आशीष झुनझुनवाला ने कहा कि नागार्जुन का संपूर्ण जीवन और लेखन लोककल्याण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साहित्य संवाद जैसे आयोजन समाज में संवेदनशील हस्तक्षेप का कार्य करते हैं।
अध्यक्षीय संबोधन में भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि "कवि अंधेरे में जुगनू की तरह हैं।" उन्होंने कहा कि नागार्जुन के काव्य में ज्येष्ठ मास की तपिश और पूर्णिमा की शीतलता दोनों साथ-साथ विद्यमान हैं। नागार्जुन ऐसे असाधारण कवि थे जो साधारण मनुष्य के जीवन को अपनी दृष्टि का केंद्र बनाते थे। उन्होंने कहा कि आज प्रतिरोध की परंपरा वाले कवि कम दिखाई देते हैं, हालांकि असहमति व्यक्त करने वाले रचनाकार अभी भी मौजूद हैं।
कार्यक्रम में युवा कवि पराग पावन ने 'उनसे मिलने निकल जाओ', 'साड़ियाँ', 'छूने के बारे में कुछ वाक्य', 'एक आवाज आती है', 'स्त्रियां', 'असली हत्यारे' और 'बेरोज़गार' जैसी कविताओं का प्रभावशाली पाठ किया। कवयित्री ज्योति शोभा ने 'विस्थापित', 'खुदकुशी', 'एक प्रेम पत्र कितने काम आ रहा है', 'मेरे बगल में रहना' और 'बड़े कवि' शीर्षक रचनाएँ प्रस्तुत कीं। वहीं नागेंद्र पंडित ने 'नौकरी टावर', 'मेरी माँ कहानियाँ नहीं समझतीं', 'मंगल से पृथ्वी की आस', 'माँ की भाषा', 'आओ सफ़ाई करते हैं' तथा 'मैं तो चला जाऊँगा' जैसी कविताओं का पाठ किया। कविताओं में प्रेम, प्रकृति, प्रतिरोध, विस्थापन, परिवार और आमजन के जीवन की गहरी संवेदनाएँ उभरकर सामने आईं।
संवाद सत्र में विकास साव, सूर्य देव रॉय, संतोष सिंह, अजय पोद्दार, फरहान अजीज तथा संजना जायसवाल ने कवियों से समकालीन कविता और साहित्य से जुड़े प्रश्न पूछे।
समीक्षा प्रस्तुत करते हुए आसनसोल गर्ल्स कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कृष्ण कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पराग पावन ऐसे कवि हैं जो दुनिया को बदलने का सपना देखते हैं और उनकी कविताएँ युवाओं को विशेष रूप से आकर्षित करती हैं। वहीं डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी ने कहा कि नागेंद्र पंडित की कविताओं में परिवार, अपनी मिट्टी और मानवीय संवेदनाओं के प्रति गहरा लगाव दिखाई देता है।
कार्यक्रम के मॉडरेटर संजय जायसवाल ने कहा कि नागार्जुन का सौंदर्यबोध समाज के हाशिए पर खड़े लोगों के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है और कविता का वास्तविक संसार मनुष्यता का संसार है।
इस अवसर पर कवि परिचय सत्र में शिवम तिवारी, निधि सिंह, कुसुम भगत तथा सत्यम पांडेय ने भी अपनी कविताओं का पाठ किया।
कार्यक्रम में मृत्युंजय श्रीवास्तव, महेश जायसवाल, मंजु श्रीवास्तव, आशुतोष सिंह, सेराज खान बातिश, सुरेश शॉ, पद्माकर व्यास, फूलचंद राम, संजय दास, आनंद गुप्ता, रितेश पांडेय, अमरजीत पंडित, मंटू दास, योगेश साव, धीरज केशरी, डॉ. सुमन शर्मा, रूपल साव, संजय यादव, विनोद यादव, मनीषा गुप्ता, डॉ. इबरार ख़ान, सुषमा कुमारी, प्रमोद महतो, चेतना सिंह, चंदना मंडल, सूर्य देव रॉय, ज्योति चौरसिया, अदिति दूबे, अजय पोद्दार, रूपेश यादव, सौमेय्या सरबत, ज्योति सिंह सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। अंत में रामनिवास द्विवेदी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
What's Your Reaction?

