नैहाटी में ‘डॉ. भोला प्रसाद सिंह स्मृति व्याख्यानमाला’ का प्रथम व्याख्यान संपन्न

नैहाटी के समरेश बसु मंच में आयोजित डॉ. भोला प्रसाद सिंह स्मृति व्याख्यानमाला के प्रथम व्याख्यान में वरिष्ठ आलोचक शंभुनाथ ने आधुनिकता, एआई युग और वैज्ञानिक दृष्टि पर महत्वपूर्ण विचार रखे।

Mar 2, 2026 - 21:46
Mar 2, 2026 - 21:47
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नैहाटी में ‘डॉ. भोला प्रसाद सिंह स्मृति व्याख्यानमाला’ का प्रथम व्याख्यान संपन्न
डॉ. शंभुनाथ

 आधुनिकता अब डिजिटल पिंजड़ा- शंभुनाथ

नैहाटी के समरेश बसु मंच में आयोजित डॉ. भोला प्रसाद सिंह स्मृति व्याख्यानमालाके प्रथम व्याख्यान में वरिष्ठ आलोचक शंभुनाथ ने आधुनिकता की परंपरा : समस्याएँ और उपलब्धियाँविषय पर विचार रखते हुए कहा कि जो आधुनिकता मुक्ति-द्वार के रूप में आई थी, वह आज डिजिटल पिंजड़े में तब्दील होती दिख रही है। उन्होंने औद्योगीकरण, एआई युग, ज्ञान पर सत्ता-नियंत्रण और बढ़ते कट्टरपंथ के संदर्भ में वैज्ञानिक दृष्टि और उदारता की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में शिक्षकों, छात्रों और बुद्धिजीवियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कांचरापाड़ा की संस्था पगडंडी : नई राह की तलाशद्वारा आयोजित इस स्मृति व्याख्यानमाला का उद्देश्य शिक्षाविद् और संस्कृतिकर्मी डॉ. भोला प्रसाद सिंह के बौद्धिक अवदान को स्मरण करना था। सभागार शिक्षकों, छात्रों और स्थानीय बुद्धिजीवियों से खचाखच भरा रहा।

मुख्य वक्तव्य: शंभुनाथ के विचार

मुख्य वक्ता शंभुनाथ (वागर्थ के संपादक, भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता के निदेशक एवं वरिष्ठ आलोचक) ने आधुनिकता की परंपरा : समस्याएँ और उपलब्धियाँविषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

उन्होंने कहा-

  • आधुनिकता संदेह, प्रश्न और तर्क की उपज है।
  • औद्योगीकरण आधुनिकता के आगमन का प्रमुख कारक रहा।
  • एआई युग में कूपमंडूकता और आधुनिकता सहयात्री बन गए हैं।
  • ज्ञान पर सत्ता का नियंत्रण स्थापित हो रहा है।
  • विचार पूजित वस्तुओं में बदले जा रहे हैं।
  • आधुनिकता अब केवल फॉर्ममें रह गई है, उसकी दृष्टिक्षीण हो रही है।

उन्होंने बढ़ते कट्टरपंथ और संकीर्णता के विरुद्ध वैज्ञानिक दृष्टि, खुले मन और उदारता को आवश्यक बताया।

स्मरण और सम्मान

कार्यक्रम का आरंभ स्वर्गीय डॉ. भोला प्रसाद सिंह के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ।

  • डॉ. अंजू सिंह ने अतिथि का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।
  • विद्यासागर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. संजय जायसवाल ने शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया।
  • वरिष्ठ पत्रकार गंगा प्रसाद ने मोमेंटो प्रदान किया।

नाट्यकर्मी सुशील कांति ने स्वागत भाषण दिया और कबीर का पद मन पंछी रा रे…’ गाकर कार्यक्रम की संवेदनात्मक भूमिका रची।

डॉ. भोला प्रसाद सिंह का व्यक्तित्व

डॉ. कलावती कुमारी ने अपने वक्तव्य में कहा कि डॉ. भोला प्रसाद सिंह केवल शिक्षक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक ऊर्जा के स्रोत थे। उन्होंने कांचरापाड़ा में अनेक पीढ़ियों को साहित्य और सांस्कृतिक कर्म से जोड़ा। उन्होंने कहा कि यह व्याख्यानमाला उनके विद्यार्थियों और मित्रों द्वारा उन्हें याद करने का विनम्र प्रयास है।

बहस और संवाद

कार्यक्रम का संचालन संजय राय ने किया। उन्होंने सत्ता और बाजार के संदर्भ में कट्टरपंथी मानसिकता की उपयोगिता पर प्रश्न उठाया और आधुनिकता पर पुनर्विचार की आवश्यकता रेखांकित की। शिक्षक राजेश कुमार पांडेय और प्रोफेसर एन. चंद्र राव के प्रश्नों ने गोष्ठी को बहसतलब बनाया। मंच पर माणिकचंद प्रसाद, इंदु सिंह और गंगा प्रसाद की उपस्थिति रही। गंगा प्रसाद ने विचार और व्यवहार के बीच की दूरी को कम करने की आवश्यकता पर बल दिया।

अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ अगले वर्ष व्याख्यानमाला की दूसरी कड़ी आयोजित करने की घोषणा की गई।

 

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पूजा अग्रहरि पूजा अग्रहरि ने 2020 में दैनिक विश्वमित्र से पत्रकारिता की शुरुआत की। युवा शक्ति और जागो देश यूट्यूब चैनलों से जुड़ने के बाद, वर्तमान में पिछले 1 वर्ष से ‘जागो टीवी’ वेब पोर्टल में कंटेंट राइटर हैं। ‘कोई और राकेश श्रीमाल’ पुस्तक की सह-संपादक रही हैं। आपने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, कोलकाता केंद्र से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर किया है।