इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस अजय भनोट के कोर्ट रूम में वकीलों का हंगामा, कथित तोड़फोड़; जज को सुरक्षा ने पीछे के दरवाजे से सुरक्षित निकाला

इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति अजय भनोट की अदालत में अधिवक्ता के कथित अपमान पर विवाद। बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कार्रवाई की माँग की।

Oct 28, 2026 - 13:44
Oct 28, 2026 - 13:45
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इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस अजय भनोट के कोर्ट रूम में वकीलों का हंगामा, कथित तोड़फोड़; जज को सुरक्षा ने पीछे के दरवाजे से सुरक्षित निकाला
जस्टिस अजय भनोट के कोर्ट रूम में वकीलों का हंगामा

इलाहाबाद हाईकोर्ट में कथित तोड़फोड़; जज को सुरक्षाबलों ने पीछे के दरवाजे से सुरक्षित निकाला

प्रयागराज, 28 अक्तूबर 2026 । इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज (बुधवार) को जस्टिस अजय भनोट के कोर्ट रूम नंबर 49 में वकीलों का बड़ा हंगामा हुआ। सोशल मीडिया और कुछ स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार वकीलों ने कोर्ट रूम में तोड़फोड़ भी की। सुरक्षाबलों ने जस्टिस भनोट को पीछे के दरवाजे से सुरक्षित बाहर निकाला। यह घटना मंगलवार (27 अक्तूबर) को हुई घटना के आक्रोश का नतीजा बताई जा रही है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर जस्टिस भनोट की अदालत के बहिष्कार की चेतावनी दी थी।

क्या हुआ था 27 अक्तूबर को?

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अनुसार, 27 अक्तूबर को कोर्ट रूम नंबर 49 में जस्टिस अजय भनोट की अदालत में सुनवाई के दौरान एक पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता (AGA) के पीछे वाली पंक्ति में बैठे थे। जस्टिस भनोट ने पुलिस अधिकारियों या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के बैठने के लिए अगली पंक्ति में अलग कुर्सी रखने की प्रथा शुरू की थी।

एक अधिवक्ता ने सम्मानपूर्वक अधिकारी से कहा—“यह आपकी सीट नहीं है, आप पीछे बैठ जाइए।” इस पर AGA ने अधिवक्ता को फटकार लगाई और कहा कि जज के आने पर शिकायत करेंगे। जस्टिस भनोट के कोर्ट में पहुँचने के बाद AGA ने शिकायत की। बार एसोसिएशन के पत्र के मुताबिक जज ने अधिवक्ता की ओर उंगली उठाते हुए कड़े शब्दों में जेल भेजने का आदेश दिया। जब अधिवक्ता ने माफी माँगी तो जज ने उन्हें पुलिस अधीक्षक से माफी माँगने को मजबूर किया। साथ ही कोर्ट में मौजूद वरिष्ठ अधिवक्ता बी.पी. श्रीवास्तव का भी मजाक उड़ाने का आरोप लगाया गया।

बार एसोसिएशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों अध्यक्ष डॉ. सी.पी. उपाध्याय (सीनियर एडवोकेट) और महासचिव संतोष कुमार मिश्रा ने उसी दिन मुख्य न्यायाधीश को रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से पत्र लिखा। पत्र में कहा गया कि यह घटना अधिवक्ताओं की गरिमा के खिलाफ है। पत्र में चेतावनी दी गई—“यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई तो हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जस्टिस अजय भनोट की कोर्ट का बहिष्कार करेगा। यदि कोर्ट वकील का अपमान करने के लिए स्वतंत्र है तो वकील भी कोर्ट का अपमान करने से नहीं हिचकेगा।” एसोसिएशन ने पुलिस अधिकारियों के लिए अलग सीट की नई प्रथा पर भी आपत्ति जताई। जस्टिस भनोट या हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से इस पत्र या घटना पर कोई आधिकारिक जवाब अभी तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

28 अक्तूबर का हंगामा

मंगलवार की घटना के बाद बुधवार सुबह वकीलों में आक्रोश फूट पड़ा। पत्रकार ममता त्रिपाठी और अनुरग चड्ढा सहित कई लोगों ने सोशल मीडिया पर पोस्ट और वीडियो शेयर किए। इन रिपोर्ट्स के अनुसार कोर्ट रूम नंबर 49 में वकीलों ने हंगामा किया और तोड़फोड़ की। सुरक्षाबलों ने स्थिति को गंभीर मानते हुए जस्टिस भनोट को पीछे के दरवाजे से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

आज दो एसपी सोनभद्र के अभिषेक वर्मा और संत कबीर नगर के संदीप कुमार मीना की पर्सनल अपीयरेंस लगी थी। दोनों अधिकारी कोर्ट रूम छोड़कर निकल गए। वकीलों की संख्या लगातार बढ़ने के साथ पूरा कोर्ट परिसर तनावपूर्ण हो गया। कुछ रिपोर्ट्स में कार्य बहिष्कार की भी बात कही गई है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन वकीलों के समर्थन में बताई जा रही है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में भी कोर्ट परिसर में तोड़फोड़ के मामले का जिक्र करते हुए बार एसोसिएशन के पत्र का विस्तार से उल्लेख किया गया है।

क्या कहते हैं स्रोत

  • बार एसोसिएशन: घटना को अधिवक्ताओं की गरिमा पर हमला बताते हुए कार्रवाई की माँग।
  • सोशल मीडिया और पत्रकार: वीडियो और पोस्ट्स में हंगामा, तोड़फोड़ और जज के सुरक्षित निकाले जाने की पुष्टि।
  • आधिकारिक स्थिति: हाईकोर्ट प्रशासन या मुख्य न्यायाधीश की ओर से कोई विस्तृत बयान अभी उपलब्ध नहीं। घटना की पूर्ण जाँच और नुकसान का आकलन होना बाकी है।

आगे क्या?

यह घटना बार और बेंच के बीच तनाव को रेखांकित करती है। अधिवक्ताओं की गरिमा, कोर्ट रूम में बैठने की व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया के सम्मान जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं। मुख्य न्यायाधीश के हस्तक्षेप और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है। स्थिति सामान्य होने तक कोर्ट परिसर में सुरक्षा बढ़ाई जा सकती है।

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I