प्रयागराज में 3 दरोगा निलंबित: 6.55 लाख की कथित बरामदगी, केस में 87,500 रुपये का जिक्र
प्रयागराज के नैनी थाने से जुड़े मामले में 6.55 लाख रुपये की कथित बरामदगी और मुकदमे में दर्ज 87,500 रुपये की रकम को लेकर विवाद। तीन चौकी प्रभारी निलंबित, न्यायालय के निर्देश पर जाँच जारी।
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में नैनी थाने से जुड़े एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट के मामले में बरामदगी की रकम को लेकर विवाद सामने आया है। मध्य प्रदेश के रीवा निवासी विपिन कुमार पाठक और आकाश सिंह की गिरफ्तारी के दौरान 6.55 लाख रुपये मिलने की बात सामने आई, जबकि मुकदमे में 87,500 रुपये की बरामदगी दर्ज होने का आरोप है। मामले में अरैल चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक विक्की गुप्ता, कांशीराम चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक रामानंद विश्वकर्मा और जिला कारागार चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक नीलेश कुमार को निलंबित कर दिया गया है। प्रारंभिक जाँच में उनकी भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद विभागीय जाँच के आदेश दिए गए हैं।
न्यायालय में रिमांड अर्जी खारिज
न्यायालयीन दस्तावेज के अनुसार, मामला अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश, एनडीपीएस एक्ट, प्रयागराज की अदालत में पहुंचा था। अदालत ने 15 अक्तूबर 2026 को पुलिस की रिमांड अर्जी पर विचार करते हुए उसे खारिज कर दिया और पुलिस टीम पर लगाए गए आरोपों की जाँच कराने का पुलिस आयुक्त प्रयागराज को निर्देश दिया।
बरामदगी की रकम को लेकर क्या है विवाद?
मामले में गिरफ्तार दोनों युवकों की ओर से आरोप लगाया गया कि पुलिस ने उनके पास से मिली रकम की वास्तविक मात्रा के अनुरूप बरामदगी दर्ज नहीं की और फर्जी बरामदगी दिखाई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, गिरफ्तारी के दौरान 6.55 लाख रुपये मिलने की बात कही गई, जबकि मुकदमे में 87,500 रुपये की नकदी बरामद होना दर्ज किया गया।
हालांकि, इन दोनों रकमों के बीच अंतर के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जाँच के बाद ही निकाला जा सकता है। यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि गिरफ्तारी के समय कितनी नकदी मौजूद थी, उसे किस प्रक्रिया के तहत जब्त किया गया और बरामदगी संबंधी अभिलेखों में दर्ज रकम का आधार क्या था।
एफआईआर में क्या दर्ज है?
नैनी थाने में 15 अक्तूबर 2026 को मुकदमा संख्या 0543/2026 दर्ज किया गया। इसमें एनडीपीएस एक्ट, 1985 की धाराओं 8 और 21 तथा आर्म्स एक्ट की धाराओं 3 और 25 का उल्लेख है। एफआईआर में पुलिस ने आरोपियों से नकदी, मोबाइल फोन, कथित मादक पदार्थ और हथियारों की बरामदगी का विवरण दर्ज किया है। ये पुलिस द्वारा दर्ज किए गए आरोप और बरामदगी के दावे हैं; इनकी सत्यता तथा उनसे संबंधित विवाद का अंतिम निर्धारण जाँच और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।
तीन उपनिरीक्षकों पर विभागीय कार्रवाई
इस प्रकरण में निलंबित किए गए तीन उपनिरीक्षकों के नाम हैं:
1. विक्की गुप्ता — अरैल चौकी प्रभारी।
2. रामानंद विश्वकर्मा — कांशीराम चौकी प्रभारी।
3. नीलेश कुमार — जिला कारागार चौकी प्रभारी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डीसीपी यमुनानगर विवेक चंद्र यादव ने निलंबन की पुष्टि की है। प्रारंभिक जाँच में संबंधित अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद विभागीय जाँच के निर्देश दिए गए हैं। निलंबन प्रशासनिक कार्रवाई है, इसे अपने आप में आपराधिक दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता। जाँच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि बरामदगी की रकम में कथित अंतर कैसे उत्पन्न हुआ और संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत भूमिका क्या थी।
अब जाँच में किन सवालों के जवाब जरूरी?
इस मामले में निष्पक्ष जाँच के लिए कुछ प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टता आवश्यक है। इनमें गिरफ्तारी के समय मौजूद नकदी की वास्तविक मात्रा, बरामदगी मेमो और अन्य अभिलेखों का मिलान, तलाशी की वैधानिक प्रक्रिया का पालन, उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जाँच तथा आरोपों के समर्थन में उपलब्ध अन्य साक्ष्यों का परीक्षण शामिल है। न्यायालय के निर्देशों और विभागीय जाँच के निष्कर्षों से ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, बरामदगी की रकम को लेकर उठे सवालों ने पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर चर्चा शुरू कर दी है।
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