खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज में प्रेमचंद जयंती पर ज्ञान प्रतियोगिता

खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज के हिंदी विभाग ने प्रेमचंद जयंती पर ज्ञान प्रतियोगिता और लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया। 'ईदगाह' दल प्रथम रहा तथा विद्यार्थियों ने प्रेमचंद के साहित्य पर आधारित विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

Jul 31, 2026 - 19:26
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खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज में प्रेमचंद जयंती पर ज्ञान प्रतियोगिता
खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज में प्रेमचंद जयंती पर ज्ञान प्रतियोगिता

कोलकाता, 31 जुलाई। खुदीराम बोस सेंट्रल कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा महान कथाकार एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती साहित्यिक गरिमा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विद्यार्थियों में प्रेमचंद के साहित्य, व्यक्तित्व और सामाजिक दृष्टि के प्रति रुचि विकसित करने के उद्देश्य से ‘प्रेमचंद ज्ञान प्रतियोगिता’ तथा विभागीय कौशल लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान के स्मरण के साथ हुआ। हिंदी विभाग की शिक्षिकाओं ने उनके जीवन, साहित्य और सामाजिक सरोकारों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को उनके साहित्य से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।

इस अवसर पर अनिशा पंडित एवं आकाश मेहता ने प्रेमचंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व का परिचय प्रस्तुत किया, जबकि नेहा परवीन ने प्रेमचंद के संपूर्ण साहित्य पर आधारित एक प्रभावशाली कविता का पाठ कर उपस्थित विद्यार्थियों को भावविभोर कर दिया।

इसके बाद आयोजित प्रेमचंद ज्ञान प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिता में प्रेमचंद के जीवन, प्रमुख उपन्यासों, कहानियों तथा हिंदी साहित्य में उनके योगदान से संबंधित प्रश्न पूछे गए। प्रतियोगिता की विशेषता यह रही कि प्रतिभागी दलों के नाम प्रेमचंद की प्रसिद्ध कृतियों ईदगाह, बूढ़ी काकी, निर्मला और सेवासदन के आधार पर रखे गए, जिससे आयोजन में साहित्यिक वातावरण और अधिक सजीव हो उठा।

प्रतियोगिता में ईदगाह दल (चांदनी कामती एवं संजना मंडला) ने प्रथम, बूढ़ी काकी दल (सारिका हेला एवं अमृता महतो) ने द्वितीय, निर्मला दल (अंकिता कुमारी एवं नाजिया परवीन) ने तृतीय तथा सेवासदन दल (अनिशा पंडित एवं स्नेहा) ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया।

इसी अवसर पर आयोजित विभागीय कौशल लेखन प्रतियोगिता में सोहानी भगत एवं आकाश मेहता ने प्रथम, संगीता बारा एवं पायल कुमारी प्रसाद ने द्वितीय तथा नंदिनी वर्मा एवं चांदनी कुमारी प्रसाद ने तृतीय स्थान हासिल किया।

हिंदी विभाग की शिक्षिका डॉ. मधु सिंह ने कहा कि इस प्रकार की साहित्यिक गतिविधियाँ विद्यार्थियों में अध्ययन की रुचि, साहित्यिक चेतना और हिंदी भाषा-साहित्य के प्रति लगाव को सुदृढ़ करती हैं। वहीं विभागाध्यक्ष डॉ. शुभ्रा उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा कि प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रेमचंद की रचनाओं का गंभीर अध्ययन करने का आह्वान करते हुए कहा कि उनके साहित्य में निहित मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक न्याय और जीवन-मूल्य आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे।

कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता और प्रेमचंद के साहित्य के प्रति नई जिज्ञासा के साथ हुआ।

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I