OTP सिस्टम बना कैदियों की शिक्षा का ‘लॉक’: अयोध्या जिला कारागार में एक भी कैदी का उच्च शिक्षा में प्रवेश नहीं
अयोध्या जिला कारागार में OTP आधारित ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के कारण एक भी कैदी उच्च शिक्षा में प्रवेश नहीं ले पाया। मोबाइल की अनुपलब्धता ने शिक्षा का रास्ता रोक दिया।
अयोध्या, उत्तर प्रदेश। अयोध्या से एक अत्यंत चिंताजनक और संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां जिला कारागार में बंद कैदियों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना लगभग असंभव हो गया है। समाजसेवी व राजनीतिकर्मी संजय वर्मा द्वारा दाखिल जनसूचना के माध्यम से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों और पत्राचार के अनुसार, वर्तमान समय में उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण के दौरान OTP आधारित सत्यापन अनिवार्य किया गया है। यह OTP संबंधित मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है। लेकिन जेल नियमों के अनुसार कैदियों को मोबाइल फोन रखने या उपयोग करने की अनुमति नहीं होती। ऐसे में कैदी OTP प्राप्त करने में असमर्थ हैं, जिसके परिणामस्वरूप अब तक एक भी कैदी का उच्च शिक्षा में प्रवेश नहीं हो पाया है।
क्या कहता है दस्तावेज?
कारागार प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में उच्च शिक्षा हेतु नामांकित छात्रों की संख्या: शून्य। LLB सहित किसी भी कोर्स में कोई छात्र नामांकित नहीं। Virtual Conference जैसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं। विश्वविद्यालय (UPRTOU) द्वारा केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। वैकल्पिक व्यवस्था (ऑफलाइन/मैनुअल प्रवेश) की अनुमति नहीं दी गई है।
मौलिक अधिकारों का उल्लंघन?
भारतीय संविधान के तहत शिक्षा को एक महत्वपूर्ण अधिकार माना गया है, और जेलों में सुधारात्मक न्याय (Reformative Justice) के तहत कैदियों को शिक्षा देने की व्यवस्था की जाती है। लेकिन इस मामले में तकनीकी प्रक्रिया (OTP) ने ही शिक्षा के रास्ते को अवरुद्ध कर दिया है। यह सवाल उठता है कि जब कैदियों के पास मोबाइल नहीं है, तो OTP आधारित प्रणाली क्यों लागू की गई? क्या यह व्यवस्था कैदियों के पुनर्वास और सुधार की अवधारणा के विपरीत नहीं है?
प्रशासनिक विफलता या नीति की खामी?
कारागार प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय और संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की गई थी, लेकिन विश्वविद्यालय ने स्पष्ट कर दिया कि केवल ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही प्रवेश संभव है। इससे यह स्पष्ट होता है कि नीतिगत स्तर पर समन्वय की कमी है और तकनीकी प्रणाली जमीनी वास्तविकताओं से कट चुकी है।
अयोध्या जेल का यह मामला केवल एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि एक मानवाधिकार और सुधारात्मक न्याय प्रणाली की गंभीर विफलता है। यदि जल्द ही इस पर संज्ञान नहीं लिया गया, तो यह मामला न्यायालय और मानवाधिकार आयोग तक जा सकता है।
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