नैहाटी में सांस्कृतिक पर्व: कविता, संगीत और ‘दुर्योधन’ की प्रभावशाली प्रस्तुति
नैहाटी में सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा आयोजित सांस्कृतिक पर्व में कविता पाठ, काव्य-गीत और सुशील कांति के एकल नाटक ‘दुर्योधन’ की प्रस्तुति ने दर्शकों को प्रभावित किया।
नैहाटी, 26 जुलाई। सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन, नैहाटी शाखा द्वारा रविवार को समाजसेवी दुर्गा साव के आवास, बनर्जी पाड़ा, नैहाटी में सांस्कृतिक पर्व का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कविता पाठ, काव्य-गीत और प्रसिद्ध रंगकर्मी सुशील कांति द्वारा एकल नाटक ‘दुर्योधन’ की प्रभावशाली प्रस्तुति ने उपस्थित साहित्य एवं कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत वक्तव्य से हुआ। अपने संबोधन में दुर्गा साव ने कहा कि वर्तमान समय में समाज में सांस्कृतिक चेतना धीरे-धीरे क्षीण होती जा रही है। ऐसे दौर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने और नई पीढ़ी में सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य वक्ता गंगा प्रसाद ने कहा कि सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र केवल कोलकाता तक सीमित नहीं है। आसपास के नगर और कस्बे भी अपनी रचनात्मक शक्ति से नई सांस्कृतिक दिशाएँ निर्धारित कर सकते हैं और व्यापक प्रभाव छोड़ सकते हैं।
कार्यक्रम का सफल संचालन करते हुए डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि "सांस्कृतिक पर्व रचनात्मक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण मंच है। कलाएं हमारी सांस्कृतिक विरासत और मानवीय संवेदनाओं को विस्तार देती हैं। युवा कवियों की रचनाओं में भविष्य के प्रति आश्वस्ति दिखाई देती है, जबकि संगीत संवेदनाओं को गहराई प्रदान करता है। प्रसिद्ध रंगकर्मी सुशील कांति का एकल नाटक ‘दुर्योधन’ केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक विवेकशील व्यक्ति के अंतर्द्वंद्व और मानवीय मूल्यों के प्रति उसकी गहरी प्रतिबद्धता का सशक्त कलात्मक चित्रण है।"
कार्यक्रम में सुरेश शॉ, विकास कुमार, सूर्य देव रॉय, कुसुम भगत, संजना जायसवाल, फरहान अजीज, अनूप प्रसाद एवं सत्यम पांडेय ने अपनी कविताओं का पाठ किया। वहीं हिमानी चंदा, ऊर्मि कांति और हर्षिता कुमारी ने काव्य-गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं की सराहना प्राप्त की।
इस अवसर पर राजेश मौर्य, पिंकी कांति, असित पांडेय, योगेश साव, उत्तम ठाकुर, संजय रॉय, राहुल शर्मा, मंटू दास, नवनीता दास, संदीप प्रसाद, संजीत चौधरी, ओमप्रकाश प्रसाद, रूपेश यादव और ऋषभ गुप्ता सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, कलाकार एवं साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक गतिविधियाँ समाज में संवेदनशीलता, रचनात्मकता और मानवीय मूल्यों को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम हैं।
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