बाँकुड़ा विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर कॉन्क्लेव, समकालीन शिक्षा में संदर्भीकरण पर मंथन
बाँकुड़ा विश्वविद्यालय में ‘एसटीबीटी: समकालीन शिक्षा के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा का संदर्भीकरण’ विषय पर एक-दिवसीय कॉन्क्लेव आयोजित हुआ। शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा के आधुनिक शिक्षा में अनुप्रयोग पर विचार साझा किए।
बाँकुड़ा विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर एक-दिवसीय कॉन्क्लेव, समकालीन शिक्षा में संदर्भीकरण पर हुआ मंथन
बाँकुड़ा। बाँकुड़ा विश्वविद्यालय में “एसटीबीटी : समकालीन शिक्षा के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा का संदर्भीकरण” विषय पर एक-दिवसीय विचारोत्तेजक कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और अकादमिक समुदाय से जुड़े विशेषज्ञों ने भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता, संरक्षण तथा समकालीन शिक्षा व्यवस्था में उसके प्रभावी अनुप्रयोग पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।
कॉन्क्लेव का प्रमुख आकर्षण हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल की कुलपति प्रो. नंदिनी साहू का विशेष व्याख्यान रहा। उन्होंने भारतीय विश्वविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक शिक्षाशास्त्रीय दृष्टिकोण और पद्धतियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल अतीत की विरासत के रूप में देखने के बजाय उसे आधुनिक शिक्षा के संदर्भ में पुनर्परिभाषित और संदर्भित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल सरकार के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जैव-प्रौद्योगिकी; खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एवं बागवानी तथा सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रभारी मंत्री डॉ. कल्याण चक्रवर्ती उद्घाटक एवं मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कॉन्क्लेव को पश्चिम बंगाल सरकार के जनजातीय विकास तथा अल्पसंख्यक कार्य एवं मदरसा शिक्षा विभाग के प्रभारी मंत्री श्री क्षुदिराम टुडू तथा सहकारिता, पर्यावरण एवं वन विभाग के प्रभारी राज्यमंत्री श्री दिबाकर घरामी का सान्निध्य प्राप्त हुआ।
कार्यक्रम में पूर्व सांसद एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री, भारत सरकार, डॉ. सुभाष सरकार की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। इसके अतिरिक्त बाँकुड़ा जिले के विधायक चंदना बाउरी, सत्यनारायण मुखोपाध्याय, क्षेत्रमोहन हांसदा, सौविक पात्र, बिल्लेश्वर सिन्हा और अमरनाथ शाखा भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
कॉन्क्लेव में विशिष्ट संसाधन व्यक्तियों के रूप में कलकत्ता विश्वविद्यालय के गणित विभाग की सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. (डॉ.) मंजूषा मजुमदार, हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) नंदिनी साहू तथा बंगबासी मॉर्निंग कॉलेज के इतिहास विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. देबाशीष चौधरी ने अपने विद्वत्तापूर्ण विचार रखे।
वक्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों को समकालीन शिक्षा, शोध और ज्ञान-विमर्श से जोड़ने की संभावनाओं पर चर्चा की। सम्मेलन में इस बात पर विशेष जोर रहा कि भारतीय ज्ञान की विविध परंपराओं को अकादमिक पाठ्यक्रमों और शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं से जोड़ते हुए आधुनिक संदर्भों में उपयोगी बनाया जाए।
यह आयोजन बाँकुड़ा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) रूप कुमार बर्मन के मुख्य संरक्षकत्व में संपन्न हुआ। विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि उनके नेतृत्व और दूरदर्शी अकादमिक दृष्टिकोण से ऐसे सार्थक विमर्शों तथा ज्ञान-केंद्रित आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहन मिल रहा है।
कॉन्क्लेव ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन शिक्षा से जोड़ने के लिए अकादमिक संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया और शिक्षा, संस्कृति तथा ज्ञान-विज्ञान के भारतीय दृष्टिकोण पर आगे के विमर्श की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।
What's Your Reaction?

