वंदे मातरम् की धरती पर रंगशिल्पी ने किया ‘उभयचर’ का मंचन
नैहाटी में रंगशिल्पी ने अलेक्जेंडर बेलायेव की कहानी पर आधारित ‘उभयचर’ का मंचन किया। विज्ञान, मनुष्यता और तर्कशीलता पर केंद्रित नाटक को दर्शकों की सराहना मिली।
नैहाटी में विज्ञान, मनुष्यता और तर्कशीलता के सवालों से रूबरू हुए दर्शक
नैहाटी, 21 अगस्त। कोलकाता के प्रतिष्ठित नाट्य दल रंगशिल्पी की ओर से वंदे मातरम् के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की जन्मभूमि नैहाटी में विज्ञान-कथा आधारित नाटक ‘उभयचर’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन एवं विज्ञान दरबार के संयुक्त आयोजन में हुए इस नाटक को दर्शकों की भरपूर सराहना मिली।
रूसी लेखक अलेक्जेंडर बेलायेव की कहानी पर आधारित उभयचर का स्क्रिप्ट रंगशिल्पी के निर्देशक प्लाबन बसु ने तैयार किया है। दर्शकों से खचाखच भरे सभागार में हुए मंचन के माध्यम से नाटक ने मनुष्य की संवेदना, विवेक, कल्पनाशीलता, विज्ञान और धार्मिक सत्ता के बीच के अंतर्संबंधों को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि “उभयचर मनुष्य की संवेदना, विवेक और कल्पनाशीलता का त्रिभुज है।” उन्होंने कहा कि यह साइंस फिक्शन मनुष्यता, तर्कशीलता और विज्ञान के माध्यम से धर्मसत्ता की हेजेमनी को चुनौती देता है।
कार्यक्रम में वरिष्ठ लेखक उदयराज सिंह ने कहा कि रंगशिल्पी का यह आयोजन कला, संस्कृति और भाषाई प्रेम का तार्किक प्रयास है। वहीं डॉ. प्रदीप दास ने इसे हिंदी और बांग्लाभाषियों के बीच जातीय संबंध को मजबूत करने वाला सांस्कृतिक प्रयास बताया।
शानदार अभिनय ने बांधा दर्शकों को
नाटक में प्लाबन बसु, आवेरी नाथ, साग्निक, विक्की, शांत स्वरूप, शिशिर दत्ता, सुशील कांति, स्वागता, अरिजीत, गोपाल, पार्थो, सारथी बसु, शीर्षो, ऋत्विक, सूर्य देव राय, अल्पना, अर्पिता, भूमिका, अद्रिजा, सबरी, सोमा, मैजिक, देवांजन, तन्मय एवं निर्झर ने प्रभावशाली अभिनय किया।
नाटक की मंच परिकल्पना एवं निर्माण जय चंद्र चंद्र, प्रकाश योजना दीपंकर दे, संगीत पंडित दिशारी चक्रवर्ती, संगीत एवं शब्द प्रक्षेपण विश्वजीत विश्वास, गायन सुचंद्रा भट्टाचार्य, शारीरिक विन्यास पेद्रो सुदीप्त कुंडू, रूप सज्जा रॉबिन नस्कर तथा मंच सामग्री एवं पोशाक परिकल्पना रंगशिल्पी स्टडी विंग्स द्वारा की गई।
रंगकर्मी दुलाल दा और अधिवक्ता शंकर कुमार राय को श्रद्धांजलि
मंचन के पश्चात दिवंगत रंगकर्मी दुलाल दा एवं नाट्यप्रेमी और अधिवक्ता शंकर कुमार राय के आकस्मिक निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम में वरिष्ठ लेखक उदयराज सिंह, डॉ. प्रदीप दास, डॉ. सुरोजित प्रमाणिक, डॉ. कलावती कुमारी एवं स्वप्न शील बतौर अतिथि उपस्थित रहे।
इसके अलावा वरिष्ठ पत्रकार गंगाप्रसाद, रंगकर्मी विनोद गौड़, राजेश मौर्या, हिंदी अधिकारी विकास साव, शिक्षक डॉ. सुशील पांडेय, आनंद गुप्ता, असित पांडे, अमरजीत पंडित, धीरज केशरी, डॉ. सुमन शर्मा, मनीषा गुप्ता, संजय राम, सुबास साव, संजीत पंडित, राजेश प्रसाद, प्रो. एन. चंद्रा राव, डॉ. संजय राय, डॉ. राहुल शर्मा, डॉ. इबरार खान, प्रो. लिली साह, डॉ. विकास कुमार साव, पिंकी कांति, डॉ. अनूप गुप्ता, जय कुमार यादव, ओमप्रकाश प्रसाद, सिपाली गुप्ता, अजय पोद्दार, चंदन साव, आरती यादव, पवन कुमार एवं आदित्य तिवारी सहित बड़ी संख्या में संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में चिरंजीत सिंह, विकास जायसवाल, अनूप प्रसाद, कंचन भगत, अनिल साह, मुकेश पंडित, सुमित ठाकुर एवं संजना जायसवाल के साथ नैहाटी पौरसभा का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन राजेश पांडेय ने किया।
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