हिंदी है भारतीय संस्कृतियों का आँगन | कोलकाता हिंदी मेला 2026

नववर्ष पर कोलकाता में आयोजित 31वें हिंदी मेला में साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े सैकड़ों युवा प्रतिभाओं का सम्मान, भारतीय ज्ञान परंपरा पर देशव्यापी विमर्श।

Jan 1, 2026 - 20:40
Jan 1, 2026 - 20:40
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हिंदी है भारतीय संस्कृतियों का आँगन | कोलकाता हिंदी मेला 2026
पुनर्प्रस्तुति करते प्रतिभागी

कोलकाता नववर्ष का अभिनंदन करते हुए कोलकाता के सांस्कृतिक परिदृश्य में 31वें हिंदी मेला ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना की जीवंत धारा है। साहित्य को संगीत, चित्रकला, नृत्य, अभिनय, आवृत्ति और रंगमंच जैसी कलाओं से जोड़ने वाले युवा प्रतिभागियों को जब सम्मानित किया गया, तो पूरा परिसर उत्साह, गर्व और सांस्कृतिक आत्मविश्वास से भर उठा। यह सप्ताहव्यापी हिंदी मेला सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन और भारतीय भाषा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आए कवियों, लेखकों, शिक्षकों, कलाकारों और विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।

हिंदी : भारतीय संस्कृतियों का साझा आँगन

सम्मान समारोह का उद्घाटन करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शंभुनाथ ने कहा, हिंदी भाषा भारतीय संस्कृतियों का आंगन है, जहाँ विविध बोलियाँ, परंपराएँ और अनुभव एक-दूसरे से संवाद करते हैं। कोलकाता हिंदी मेला देश के मन को जोड़ने वाला एक सशक्त युवा आंदोलन बन चुका है।” उन्होंने कहा कि जब युवा साहित्य को अन्य कलाओं से जोड़ते हैं, तब भाषा केवल पढ़ी या सुनी नहीं जाती, बल्कि अनुभूत की जाती है।

देशभर में अनोखा सांस्कृतिक आयोजन

सात दिवसीय हिंदी मेले के समापन वक्तव्य में भोपाल से पधारे वरिष्ठ कवि-लेखक डॉ. विजय बहादुर सिंह ने कोलकाता हिंदी मेला को पूरे भारत में एक अद्वितीय सांस्कृतिक आयोजन बताया। उन्होंने कहा यह मेला अपनी रचनात्मक ऊर्जा, वैचारिक गंभीरता और युवा सहभागिता के कारण निरंतर विकसित होता जाएगा और हिंदी के सांस्कृतिक वैभव को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा।”

भारतीय ज्ञान परंपरा पर गहन विमर्श

इस वर्ष हिंदी मेले का केंद्रीय विषय ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ रहा। देशभर के कवियों, लेखकों और विद्वानों ने इस विषय पर संगोष्ठियों, संवाद सत्रों और कविता पाठों के माध्यम से गहन विचार-विमर्श किया। पश्चिम बंगाल के 100 से अधिक स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से आए सैकड़ों विद्यार्थियों और युवाओं ने विभिन्न प्रतियोगिताओं और प्रस्तुतियों में भाग लेकर मेले को रचनात्मक विविधता का इंद्रधनुष बना दिया।

कोलकाता की सांस्कृतिक पहचान

सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संयुक्त महासचिव प्रो. संजय जायसवाल ने कहा कि सात दिनों तक चलने वाला यह हिंदी मेला कोलकाता के हिंदी भाषी समाज की सांस्कृतिक पहचान है। साहित्य को कलाओं से जोड़ने और उसे लोकप्रिय बनाने में हिंदी प्रेमी नागरिकों, शिक्षकों और संस्कृति कर्मियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।” उन्होंने युवाओं की बढ़ती भागीदारी को हिंदी के भविष्य के लिए शुभ संकेत बताया।

सम्मान और प्रेरणा के क्षण

इस अवसर पर डॉ. अनिता राय, आशुतोष सिंह और सुरेश शॉ को उनके अवकाश ग्रहण के अवसर पर हिंदी मेला सम्मान प्रदान कर उनके दीर्घ साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान को नमन किया गया।

पं. रामानंद द्विवेदी संस्कृत सम्मान

समापन दिवस पर रामनिवास द्विवेदी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय, बर्दवान विश्वविद्यालय और विद्यासागर विश्वविद्यालय के एम.ए. में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को ‘पं. रामानंद द्विवेदी संस्कृत सम्मान’ प्रदान किया। श्री द्विवेदी ने हिंदी मेले की सफलता के लिए आयोजकों, प्रतिभागियों और दर्शकों का अभिनंदन किया। सम्मान समारोह में पीयूष गोयल ने विद्यार्थियों का विशेष रूप से उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि शिक्षा, संस्कृति और भाषा के क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी ही भारत की बौद्धिक शक्ति को आगे बढ़ाएगी।

युवा शिखर सम्मान

हिंदी मेले के सातवें दिन आयोजित युवा शिखर सम्मान समारोह में परिषद के वित्त मंत्री  घनश्याम सुगला,  आशीष झुनझुनवाला और  शालीन खेमानी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर युवाओं को मंच, सम्मान और आत्मविश्वास तीनों का अनुभव मिला।

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