दक्षिण दिनाजपुर विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन | विज्ञान में महिलाओं की भूमिका पर विमर्श

पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रो. नंदिनी साहू ने भारतीय विज्ञान में महिलाओं की अनदेखी भूमिका पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया।

Mar 20, 2026 - 13:47
Mar 20, 2026 - 13:48
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दक्षिण दिनाजपुर विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन | विज्ञान में महिलाओं की भूमिका पर विमर्श
प्रो. नंदिनी साहू

कोलकाता, 18 मार्च 2026 । पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस और राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के संयुक्त अवसर पर एक भव्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भाग लिया, जिससे यह आयोजन एक महत्वपूर्ण बौद्धिक मंच के रूप में उभरा।

विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. प्रणब घोष के नेतृत्व में आयोजित इस सम्मेलन में राज्य की कई महिला कुलपतियों की सक्रिय भागीदारी विशेष आकर्षण रही। हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल की कुलपति प्रो. नंदिनी साहू ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार प्रस्तुत किए।

अपने व्याख्यान ‘ज्ञान की पुनर्स्थापना: भारतीय विज्ञान में महिलाओं की अनदेखी वंशावलियाँ’ में प्रो. साहू ने भारतीय वैज्ञानिक इतिहास की पारंपरिक व्याख्याओं को चुनौती देते हुए कहा कि विज्ञान को केवल पुरुष-प्रधान दृष्टिकोण से समझना अधूरा है। उन्होंने बताया कि खगोल विज्ञान, गणित, चिकित्सा और प्रजनन विज्ञान जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसे इतिहास में पर्याप्त स्थान नहीं मिला। उन्होंने विशेष रूप से सूर्य सिद्धांत, पंच सिद्धांतिका और सिद्धांत शिरोमणि जैसे ग्रंथों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हें केवल ‘शुद्ध विज्ञान’ के रूप में देखने के बजाय इनके सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों को भी समझना आवश्यक है। उनके अनुसार, इन ज्ञान परंपराओं में महिलाओं ने अवलोकन, कैलेंडर निर्माण, अनुष्ठान समय निर्धारण और घरेलू वैज्ञानिक ज्ञान के संरक्षण में अहम योगदान दिया।

प्रो. साहू ने विज्ञान में महिलाओं की भूमिका को पुनर्परिभाषित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि महिलाओं को केवल अपवाद के रूप में नहीं, बल्कि विज्ञान की आधारशिला के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने इस दिशा में नए शोध दृष्टिकोण और विधागत ढांचे विकसित करने का आह्वान किया।

सम्मेलन में अन्य विशिष्ट अतिथियों प्रो. चंद्रदीप घोश, प्रो. तजिमा गुरुंग नाग, प्रो. डैनिएला पप्पालार्डो, प्रो. ज्योतिरमयी डाश, प्रो. ज़िनिया मित्रा, प्रो. डाह्लिया भट्टाचार्य, प्रो. अशिस भट्टाचार्जी और प्रो. अर्नब सेन ने भी अपने विचार साझा किए।

यह सम्मेलन न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने विज्ञान में महिलाओं की भूमिका को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक सार्थक पहल भी प्रस्तुत की।

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