बानरहाट में 125वीं जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित

बानरहाट में लायंस क्लब द्वारा श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित हुई। वक्ताओं ने उनके शिक्षा, प्रशासन और मानवीय योगदान पर प्रकाश डाला।

Jul 6, 2026 - 20:59
Jul 6, 2026 - 21:04
 0
बानरहाट में 125वीं जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित
विचार गोष्ठी आयोजित

राजनीति, शिक्षा, प्रशासन और मनुष्यता के चतुर्भुज थे श्यामा प्रसाद मुखर्जी

बानरहाट, 6 जुलाई। लायंस क्लब, बानरहाट की ओर से श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके बहुआयामी व्यक्तित्व, शिक्षा संबंधी दृष्टि, प्रशासनिक क्षमता तथा मानवीय संवेदनाओं पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वागत वक्तव्य से हुआ। लायंस क्लब के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर योगेश साव ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र और समाज की प्रगति के लिए उल्लेखनीय कार्य किए तथा उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय संस्कृति विचारक मृत्युंजय श्रीवास्तव ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी, बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की वैचारिक परंपरा के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि थे। उन्होंने कहा कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद उनका और जवाहरलाल नेहरू का संवाद लोकतांत्रिक संस्कृति का उदाहरण था। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में मुखर्जी के सपनों को साकार करने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित विद्यासागर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के चिंतन को व्यापक संदर्भ में समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अनेक विद्वानों ने उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को सीमित दृष्टि से देखा है, जबकि वे केवल राजनेता नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट शिक्षाविद, समावेशी दृष्टि से संपन्न चिंतक और संवेदनशील प्रशासक भी थे।

डॉ. जायसवाल ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संबंध कृतिवास ओझा, सर आशुतोष मुखर्जी तथा योगमाया देवी की समृद्ध परंपरा से जुड़ा रहा। उन्होंने कहा कि उनकी वैचारिक यात्रा हिंदुत्व से होते हुए मनुष्यत्व तक पहुँचती है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मुखर्जी ने काजी नजरूल इस्लाम के उपचार की व्यवस्था कराई तथा अकाल और बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए व्यापक राहत कार्यों का संचालन किया। साथ ही उन्होंने मातृभाषा बांग्ला तथा भारतीय भाषाओं में शिक्षा की वकालत की।

हाजीनगर आदर्श हिंदी विद्यालय के शिक्षक अमरजीत पंडित ने राष्ट्रगीत प्रस्तुत करते हुए कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 'एक देश, एक निशान और एक विधान' की परिकल्पना को राष्ट्रीय एकता का आधार माना।

बानरहाट बालिका परिमल प्राइमरी स्कूल के शिक्षक शैलेन्द्र तिवारी ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस अवसर पर रंगकर्मी सूर्यदेव राय ने उनकी स्मृति में अपनी कविता का पाठ किया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्कृतिकर्मी विकास जायसवाल ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने एकीकृत शिक्षा प्रणाली पर विशेष बल दिया। अंत में लायंस क्लब के सदस्य संतोष प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के निर्माण और संरक्षण में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की ऐतिहासिक भूमिका को सदैव स्मरण किया जाएगा।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े शिक्षकों, साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, विचार और योगदान पर अपने विचार साझा किए।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I