कैद से जागेगा देश | हिंदी कविता | सुशील कुमार पाण्डेय की कविता
कैद से जागेगा देश | हिंदी कविता | राष्ट्रप्रेम पर आधारित, अन्याय और तंत्र के विरुद्ध जनचेतना जगाने वाली कविता जिसमें कवि सोनम वांगचुक के कैद को देशसेवा मानकर देश के जागरण का संदेश देता है। पढ़ें पूरी कविता
कैद से जागेगा देश
वे कहते हैं
कैद से जागेगा देश
उन्हें डर नहीं
डर तो उन दिलों में होता है
जो सच से डरते हैं
वे तो इंतजार करते हैं
कब आएँ हथकड़ियाँ
कब उन्हें बंद किया जाए
सलाखों के भीतर
क्योंकि वे जानते हैं
उनकी कैद
उनकी आजादी से
ज्यादा जगाएगी देश को
जब देश देखेगा
वही आदमी
जिसने पाया था मैगसेसे पुरस्कार
जिसपर बनी थी सफल फिल्म
जिसे मिला था ऑनरेरी डॉक्टरेट
जिसे मिले थे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार
जिसने ज्ञान को किया था
सीमाओं के पार निर्यात
जिसने चीन की वस्तुओं के विरुद्ध
फूँका था स्वदेशी का बिगुल
वे कहते हैं
देश सोचेगा
समझेगा
कैसे चल रहा है देश का तंत्र
कैसे झुकता है इंसाफ का तराजू
उनका जेल
उनका सीमाहीन आंदोलन है
उनकी कैद
उनकी अप्रतिम देशसेवा है
क्योंकि जब वे होंगे सलाखों के भीतर
बाहर करोड़ों आँखें जागेंगी
उनकी कैद से ही जन्म लेगी
एक नई आजादी
जिसे कहा जा रहा है
आईएसआई का एजेंट
एन एस ए का अपराधी
वह उठाएगा नकाब
असल अपराधियों के
चेहरों से।
सुशील कुमार पाण्डेय
संपर्क: 25-26, रोज मेरी लेन, हावड़ा - 711101, मो,: 88 20 40 60 80 / 9681 10 50 70
ई-मेल : aapkasusheel@gmail.com
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