कोलकाता में शुरू हुआ सात दिवसीय 31वाँ हिंदी मेला | युवाओं की नाट्य प्रतिभा का उत्सव
कोलकाता में 31वें हिंदी मेला की शुरुआत साहित्य, रंगमंच और युवा ऊर्जा के सशक्त संगम के साथ हुई। उद्घाटन सत्र में विचार, सम्मान और नाट्य प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध किया कि हिंदी मेला आज भी भारतीय संस्कृति की जीवंत आवाज है।
कोलकाता में सात दिवसीय 31वाँ हिंदी मेला भव्य रूप से शुरू
युवाओं की नाट्य-प्रतिभा और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत उत्सव
कोलकाता | 26 दिसंबर | सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन एवं भारतीय भाषा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय 31वाँ हिंदी मेला का उद्घाटन आज परिषद सभागार में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह आयोजन केवल एक वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हिंदी भाषा, भारतीय संस्कृति और युवा रचनात्मकता के निरंतर पुनर्निर्माण का जीवंत मंच बनकर उभरा।
पत्रिका का लोकार्पण और वैचारिक उद्घाटन
उद्घाटन समारोह में सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक पत्रिका (नवंबर 2025–जनवरी 2026 अंक) का लोकार्पण किया गया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ आलोचक डॉ. विजय बहादुर सिंह ने अपने उद्घाटन वक्तव्य में कहा, “साहित्य ही सत्य की रक्षा करता है और सत्य की रक्षा के बिना मनुष्यता नहीं बच सकती। हिंदी मेला जैसे आयोजन आज के समय में केवल साहित्यिक नहीं, बल्कि नैतिक और सांस्कृतिक हस्तक्षेप हैं।” उन्होंने हिंदी मेला को देश की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक घटनाओं में से एक बताते हुए इसे मातृभाषा से प्रेम और सांस्कृतिक उत्तरदायित्व का प्रतीक कहा।
‘माधव शुक्ल नाट्य सम्मान’ से सम्मानित अमिताभ श्रीवास्तव
उद्घाटन सत्र का विशेष आकर्षण रहा ‘माधव शुक्ल नाट्य सम्मान’, जो राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, दिल्ली से जुड़े वरिष्ठ रंगकर्मी एवं टीवी कलाकार अमिताभ श्रीवास्तव को प्रदान किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “माधव शुक्ल ने लगभग सौ वर्ष पूर्व कोलकाता में हिंदी रंगमंच की नींव रखी। आज यहां के युवा कलाकार ही उस परंपरा को आगे बढ़ाकर हिंदी रंगमंच में नई जान डाल सकते हैं।” यह सम्मान कोलकाता की ऐतिहासिक हिंदी रंगपरंपरा को समर्पित एक भावनात्मक क्षण बन गया।
अतिथियों के विचार: परंपरा से भविष्य तक
भारतीय भाषा परिषद की मंत्री राजश्री शुक्ला ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि “31वाँ हिंदी मेला किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों के सांस्कृतिक परिश्रम की परिणति है। जो कभी प्रतिभागी थे, आज वही इसके कर्णधार हैं यही इसकी सबसे बड़ी सफलता है।” सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संरक्षक रामनिवास द्विवेदी ने कहा कि हिंदी मेला निरंतर चलता रहेगा क्योंकि यह स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्कार विकसित करता है। मिशन के अध्यक्ष शंभुनाथ ने हिंदी मेला को “डिजिटल मीडिया और ग्लैमर आधारित लिटरेचर फेस्टिवलों के दौर में मनुष्यता, रचनात्मकता और भारतीय संस्कृति को बचाने का अभियान” बताया। वरिष्ठ पत्रकार विश्वंभर नेवर ने हिंदी मेले की 31 वर्षों की गौरवशाली यात्रा को अपनी आंखों देखी सांस्कृतिक विरासत बताते हुए इसकी निरंतर सफलता की कामना की।
वार्षिक प्रतिवेदन और आयोजन की दृष्टि
कार्यक्रम के आरंभ में मिशन का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए डॉ. राजेश मिश्र ने कहा कि “हिंदी मेला सबको जोड़ने का मंच है यह भाषा, विचार और संवेदना के स्तर पर सामाजिक एकता का प्रयास है।” संयुक्त महासचिव संजय जायसवाल ने बताया कि लघु नाटक प्रतियोगिता में 16 शिक्षण संस्थानों और नाट्य दलों की सहभागिता रही। उन्होंने इसे “सांस्कृतिक प्रदूषण के विरुद्ध युवाओं का सशक्त सांस्कृतिक अभियान” बताया, जो आगे भी जारी रहेगा।
लघु नाटक प्रतियोगिता: युवाओं का सशक्त मंच
हिंदी मेला के प्रथम दिन आयोजित लघु नाटक प्रतियोगिता ने पूरे आयोजन को जीवंत कर दिया। इसमें ऋषि बंकिम चंद्र संध्या महाविद्यालय, विद्यासागर विश्वविद्यालय नाट्य मंच, विद्यासागर कॉलेज फॉर वूमेन, ऋषि बंकिम चंद्र कॉलेज फॉर वूमेन, मेदिनीपुर कॉलेज, बेथुन कॉलेज, नैहाटी आनंदस्वरूप हाई स्कूल, हाजीनगर आदर्श हिंदी विद्यालय, आदर्श हिंदी नाट्य मंच, देशबंधु महाविद्यालय, स्टडी मिशन, स्वतंत्र प्रतिभागी, असेंबली ऑफ़ लिटिल बर्ड्स और आदित्य अकादमी सहित अनेक संस्थानों एवं स्वतंत्र दलों ने अपने नाटकों का मंचन किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में महेश जायसवाल, सुशील कांति और प्लबन बसु उपस्थित रहे।
विनोद कुमार शुक्ल को श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के आरंभ में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ हिंदी लेखक विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिसने पूरे सभागार को संवेदनशील मौन में बांध दिया।
संचालन और संगठनात्मक सहयोग
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन लिली साह, पुष्पा मल्ल और श्रद्धा उपाध्याय ने किया। आयोजन को सफल बनाने में संजय यादव, हंस राज, प्रमोद कुमार, अजय पोद्दार, ज्योति चौरसिया, कंचन भगत, स्वीटी कुमारी महतो, अनुराधा भगत, चंदन भगत, कुसुम भगत, फरहान अजीज, अनूप प्रसाद सहित मिशन के अनेक सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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