प्रख्यात चित्रकार सुलोचना सारस्वत को श्रद्धांजलि: कला, संघर्ष और संवेदना की स्मृति में भावपूर्ण सभा आयोजित

कोलकाता के भारतीय भाषा परिषद में प्रसिद्ध चित्रकार सुलोचना सारस्वत की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई, जिसमें कला-जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने उनके योगदान को याद किया।

Mar 29, 2026 - 05:44
Mar 29, 2026 - 05:44
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प्रख्यात चित्रकार सुलोचना सारस्वत को श्रद्धांजलि: कला, संघर्ष और संवेदना की स्मृति में भावपूर्ण सभा आयोजित
विश्व भारती विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर प्रो. मंजू रानी सिंह श्रद्धांजलि सभा में भावभीनी संवेदना व्यक्त करते हुए

कोलकाता, 28 मार्च। सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन की ओर से कोलकाता के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय भाषा परिषद में प्रख्यात चित्रकार सुलोचना सारस्वत की स्मृति में एक गरिमामय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह सभा न केवल एक कलाकार को स्मरण करने का अवसर बनी, बल्कि उनके व्यक्तित्व, संघर्ष और सृजनशीलता को पुनः जीवंत करने का भी माध्यम बनी। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की और सुलोचना सारस्वत के जीवन और कला-साधना को याद करते हुए अपने संस्मरण साझा किए।

इस अवसर पर विश्व भारती विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर एवं सुलोचना सारस्वत की करीबी सहयोगी प्रो. मंजू रानी सिंह ने भावुक शब्दों में कहा कि सुलोचना सारस्वत एक ऐसी चित्रकार थीं, जिन्होंने प्रतिकूल परिस्थितियों में भी अपने कला-संकल्प को कभी डगमगाने नहीं दिया। उनके चित्रों में जीवन की जटिलताओं के बीच आशा और संघर्ष की झलक स्पष्ट दिखाई देती थी।

प्रख्यात चिंतक डॉ. शंभुनाथ ने कहा कि सुलोचना सारस्वत कला और संस्कृति की सच्ची साधिका थीं। उनके कार्यों में भारतीय सांस्कृतिक चेतना की गहराई और संवेदनशीलता का अद्भुत संगम दिखाई देता था।

लेखक मृत्युंजय श्रीवास्तव ने अपने तीन दशकों के व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए कहा कि सुलोचना सारस्वत एक स्वाभिमानी और स्वतंत्र व्यक्तित्व की धनी कलाकार थीं, जिन्होंने हमेशा अपने सिद्धांतों और शर्तों पर जीवन जिया।

कार्यक्रम में सेराज ख़ान बातिश, अनीता राय, जितेन्द्र जितांशु, मीनाक्षी संगोनारिया, रितेश पांडेय, राधिका सारस्वत, ऋषु सारस्वत और प्रांशी सारस्वत सहित कई वक्ताओं ने सुलोचना सारस्वत से जुड़े व्यक्तिगत अनुभवों और संस्मरणों को साझा करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

सभा में प्रो. हितेन्द्र पटेल, शिप्रा मिश्रा, डॉ. संजय राय, अल्पना नायक, मंटू दास, श्रद्धांजलि सिंह, राकेश सिंह, अंजलि साव, संजना जायसवाल, अनिल साह, आशुतोष राउत, सत्यम पांडेय, अनूप प्रसाद, शिखा सिंह, डॉ. रमाशंकर सिंह, प्रमोद महतो, भवानी शंकर सारस्वत, संजय दास, चंदना मंडल, सूर्य देव रॉय, कंचन भगत, अनुश्री साव, शुभोस्वप्ना मुखर्जी सहित बड़ी संख्या में उनके मित्र, शुभचिंतक और कला-प्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए मिशन के महासचिव डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि सुलोचना सारस्वत का योगदान केवल चित्रकला तक सीमित नहीं था, बल्कि वे हर वर्ष हिंदी मेला में सक्रिय भागीदारी निभाते हुए युवा प्रतिभाओं को मार्गदर्शन देती थीं। उनके जाने से कला-जगत में एक ऐसी रिक्तता उत्पन्न हुई है, जिसकी पूर्ति करना कठिन है। सभा के अंत में सभी उपस्थितजनों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

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