UP Police: अब हर मामले में नहीं होगी FIR, DGP का सख्त निर्देश, नियम विरुद्ध केस दर्ज करने पर नपेंगे थानेदार

डीजीपी राजीव कृष्ण ने पुलिस को उन मामलों में एफआईआर दर्ज करने से मना किया है जहां केवल परिवाद का प्रावधान है। हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद जारी हुए सख्त निर्देश।

Mar 29, 2026 - 07:40
Mar 29, 2026 - 07:43
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UP Police: अब हर मामले में नहीं होगी FIR, DGP का सख्त निर्देश, नियम विरुद्ध केस दर्ज करने पर नपेंगे थानेदार
उत्तर प्रदेश डीजीपी राजीव कृष्ण

लखनऊ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की कड़ी आपत्ति के बाद यूपी के डीजीपी राजीव कृष्ण ने पुलिस महकमे के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में केवल 'परिवाद' (Complaint) का प्रावधान है, उनमें एफआईआर दर्ज करना गैर-कानूनी है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

उत्तर प्रदेश में पुलिसिया कार्यप्रणाली को लेकर पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब राज्य के थानों में किसी भी मामले में आंख मूंदकर एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं की जा सकेगी। डीजीपी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन कानूनी धाराओं और अधिनियमों के तहत केवल अदालत में 'परिवाद' (Complaint) दाखिल करने की व्यवस्था है, उनमें एफआईआर दर्ज करना कानूनन गलत है।

हाईकोर्ट की फटकार के बाद जागी पुलिस

यह निर्देश इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा एक मामले में जताई गई गहरी आपत्ति के बाद आया है। अदालत ने पाया था कि पुलिस कई ऐसे मामलों में भी एफआईआर दर्ज कर रही है, जहां कानून उसे इसका अधिकार नहीं देता। कोर्ट की इसी टिप्पणी को गंभीरता से लेते हुए डीजीपी ने इसे 'गंभीर त्रुटि' माना है।

अवैध एफआईआर से आरोपी को मिलता है फायदा

डीजीपी राजीव कृष्ण ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा नियमों के विपरीत दर्ज की गई एफआईआर से न केवल पुलिस की जाँच प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि कानूनी खामियों के कारण आरोपी को न्यायालय में सीधा लाभ मिल जाता है। इससे न्याय की मूल भावना आहत होती है और पुलिस की छवि धूमिल होती है।

इन 30 से अधिक कानूनों में FIR पर रोक

निर्देश के मुताबिक, दहेज प्रतिषेध अधिनियम की कुछ धाराओं सहित लगभग 30 अलग-अलग कानून ऐसे हैं जिनमें पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती। मुख्य रूप से निम्नलिखित मामलों में अब सीधे परिवाद की प्रक्रिया अपनानी होगी:

प्रमुख कानून जिनमें केवल 'परिवाद' का प्रावधान है:

1.     मानहानि (Defamation): भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 356 (पुरानी IPC 499/500)। इसमें केवल पीड़ित व्यक्ति ही कोर्ट जा सकता है।

2.     दहेज प्रतिषेध अधिनियम (Dowry Prohibition Act): इस एक्ट की धारा 4 और 8A के कुछ विशेष प्रावधानों के तहत सीधे कोर्ट में परिवाद की व्यवस्था है (जब तक कि वह क्रूरता या हत्या से न जुड़ा हो)।

3.     चेक बाउंस (Negotiable Instruments Act): धारा 138 के तहत चेक अनादरण के मामलों में पुलिस सीधे केस दर्ज नहीं कर सकती।

4.     घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम (DV Act): धारा 12 के तहत राहत पाने के लिए मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन देना होता है।

5.     उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act): उपभोक्ताओं की शिकायतों के लिए उपभोक्ता फोरम/कमीशन का प्रावधान है।

6.     पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals Act): कई धाराओं में सीधे मजिस्ट्रेट के संज्ञान का नियम है।

7.     खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम (MMDR Act): धारा 22 के तहत केवल अधिकृत अधिकारी की लिखित शिकायत पर कोर्ट संज्ञान लेती है।

8.     खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI Act): मिलावट के मामलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा कोर्ट में वाद दायर किया जाता है।

9.     कॉपीराइट अधिनियम (Copyright Act): कुछ विशेष उल्लंघन जिनमें सीधे कोर्ट की प्रक्रिया है।

10.  ट्रेडमार्क अधिनियम (Trademarks Act): बौद्धिक संपदा के उल्लंघन से जुड़े मामले।

11.  आयकर अधिनियम (Income Tax Act): कर चोरी या दस्तावेजों में हेराफेरी पर आयकर विभाग ही परिवाद दाखिल करता है।

12.  कंपनी अधिनियम (Companies Act): कॉरपोरेट धोखाधड़ी के तकनीकी मामलों में।

13.  ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट (Drugs and Cosmetics Act): ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा कोर्ट में शिकायत।

14.  पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (Environment Protection Act): प्रदूषण बोर्ड या अधिकृत व्यक्ति द्वारा शिकायत।

15.  विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA): प्रवर्तन निदेशालय (ED) की प्रक्रिया।

16.  रेलवे अधिनियम (Railway Act): कुछ विशेष उल्लंघन जो पुलिस की एफआईआर श्रेणी से बाहर हैं।

17.  वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act): वन विभाग द्वारा कोर्ट में सीधे परिवाद।

18.  केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम: अवैध प्रसारण संबंधी मामले।

19.  न्यूनतम मजदूरी अधिनियम (Minimum Wages Act): श्रम विभाग द्वारा कोर्ट में वाद।

20.  बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम: श्रम विभाग की रिपोर्ट पर कोर्ट का संज्ञान।

21.  सिनेमैटोग्राफ एक्ट: अवैध स्क्रीनिंग या सेंसर बोर्ड नियमों का उल्लंघन।

22.  प्रिंटिंग प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम: प्रकाशन संबंधी अनियमितताएं।

23.  बीज अधिनियम (Seeds Act): बीज निरीक्षक द्वारा की गई शिकायत।

24.  कीटनाशक अधिनियम (Insecticides Act): घटिया कीटनाशक बेचने पर कोर्ट केस।

25.  विद्युत अधिनियम (Electricity Act): चोरी के अलावा कुछ प्रशासनिक उल्लंघनों में।

26.  नगर निगम/नगर पालिका अधिनियम: अवैध निर्माण या अतिक्रमण के कई मामलों में सीधे कोर्ट की कार्रवाई।

27.  जुआ अधिनियम (Public Gambling Act): कुछ राज्यों में कुछ धाराओं के तहत गैर-संज्ञेय (Non-cognizable) अपराध।

28.  माप और तौल अधिनियम (Legal Metrology Act): कम तोलने या पैकेट पर गलत जानकारी देने के मामले।

29.  आपातकालीन स्थिति में सरकारी आदेश का उल्लंघन (BNS 223 / पुरानी IPC 188): इसमें केवल सरकारी अधिकारी की लिखित शिकायत पर कोर्ट संज्ञान लेती है, पुलिस खुद एफआईआर नहीं कर सकती (बिना विशेष निर्देश के)।

30.  विवाह से जुड़े अपराध (Adultery/Bigamy): BNS की विवाह संबंधी धाराओं में केवल पीड़ित पक्ष ही कोर्ट में शिकायत कर सकता है।

अधिकारियों को चेतावनी: 'पहले कानून पढ़ें, फिर कलम चलाएँ'

डीजीपी ने सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों (Investigating Officers) को निर्देश दिया है कि वे कानूनी प्रावधानों का गहनता से अध्ययन करें। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी अधिकारी ने इन निर्देशों का उल्लंघन कर गलत तरीके से एफआईआर दर्ज की, तो उनके विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस के लिए नया प्रोटोकॉल

प्रारंभिक जाँच: पुलिस को निर्देश है कि शिकायत मिलते ही उसे एफआईआर में न बदलें, बल्कि यह देखें कि अपराध 'संज्ञेय' है या नहीं।

NCR (Non-Cognizable Report): यदि मामला परिवाद की श्रेणी का है, तो पुलिस को केवल 'असंज्ञेय रिपोर्ट' (NCR) दर्ज कर पीड़ित को कोर्ट जाने की सलाह देनी होगी।

अनुशासनात्मक कार्रवाई: यदि किसी इंस्पेक्टर ने जानबूझकर 'परिवाद' वाले मामले में FIR दर्ज की, तो उसे कारण बताओ नोटिस और निलंबन तक का सामना करना पड़ सकता है।

 

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सुशील कुमार पाण्डेय मैं, अपने देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा पर हूँ, यही मेरी पहचान है I