26 दिसंबर से भारतीय भाषा परिषद में सात दिवसीय 31वां हिंदी मेला, साहित्य-संस्कृति-युवा रचनात्मकता का महाकुंभ

26 दिसंबर से कोलकाता की भारतीय भाषा परिषद में शुरू होगा सात दिवसीय 31वां हिंदी मेला। राष्ट्रीय संगोष्ठी, कविता उत्सव, नाट्य मंचन, 14 प्रतियोगिताएं और 3 लाख से अधिक के पुरस्कार।

Dec 19, 2025 - 21:29
Dec 19, 2025 - 21:34
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26 दिसंबर से भारतीय भाषा परिषद में सात दिवसीय 31वां हिंदी मेला, साहित्य-संस्कृति-युवा रचनात्मकता का महाकुंभ
प्रेस कांफ्रेंस में उपस्थित पदाधिकारीगण

कोलकाता, 19 दिसंबर। सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन द्वारा भारतीय भाषा परिषद के सहयोग से आयोजित 31वां हिंदी मेला आगामी 26 दिसंबर से सात दिनों तक परिषद सभागार में आयोजित किया जाएगा। मेले का शुभारंभ लघु नाटक मेला से होगा, जिसमें युवा रंगकर्मी सामाजिक और साहित्यिक सरोकारों से जुड़े नाट्य प्रयोग प्रस्तुत करेंगे।

इस वर्ष हिंदी मेला की भागीदारी अभूतपूर्व है। कोलकाता, हावड़ा, हुगली, नदिया, उत्तर 24 परगना, वर्द्धमान, पुरुलिया, आसनसोल, दुर्गापुर, मिदनापुर और नॉर्थ बंगाल सहित विभिन्न क्षेत्रों से 100 से अधिक स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी और युवा 14 सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और उड़ीसा से भी प्रतिभागियों की सक्रिय उपस्थिति रहेगी। कुल मिलाकर 3000 से अधिक बच्चे, विद्यार्थी और नौजवान इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे।

राष्ट्रीय संगोष्ठी : पहली बार एक ऐतिहासिक पहल

हिंदी मेला के संदर्भ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संयुक्त महासचिव प्रो. संजय जायसवाल ने बताया कि यह देश का पहला ऐसा जनमंचीय आयोजन है, जहाँ ‘भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक हिंदी साहित्य’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी और संवाद आयोजित किया जा रहा है।

इस संगोष्ठी में भाग लेने वाले प्रमुख विद्वानों में शामिल हैं- नरेश सक्सेना (लखनऊ), विजय बहादुर सिंह (भोपाल), अवधेश प्रधान (वाराणसी), गोपेश्वर सिंह (दिल्ली), सदानंद शाही (वाराणसी), अच्युतानंद मिश्र (केरल), किशन कालजयी (भागलपुर), आशीष त्रिपाठी (वाराणसी), राहुल सिंह (शांतिनिकेतन) और तसनीम खान (रायपुर)।

कोलकाता कविता उत्सव : विविध स्वरों की उपस्थिति

हिंदी मेला के अंतर्गत आयोजित कोलकाता कविता उत्सव में देश के विभिन्न अंचलों से चर्चित कवि अपनी रचनाओं के साथ उपस्थित रहेंगे। इनमें प्रमुख हैं- अनिल त्रिपाठी, सावित्री बड़ाईक, निर्मला पुतुल, निर्मला तोदी, शहंशाह आलम, महेश आलोक, अंजुमन आरा, मृत्युंजय कुमार सिंह, राम प्रवेश रजक, मनीषा झा, संध्या नवोदिता, सुनील कुमार शर्मा, अनिरुद्ध सिन्हा, राज्यवर्धन, ज्योति शोभा, चाहत अन्वी, विनय सौरभ, शैलेश गुप्ता, रश्मि शर्मा, प्रशांत रमण रवि, घुंघरू परमार, प्रतिभा चौहान, अनिला राखेचा, गीता दूबे और मनीष यादव।

विशेष आकर्षण : ‘काव्य राग’

हिंदी मेला का इस वर्ष का विशेष आकर्षण है ‘काव्य राग’, जिसमें निराला, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, अज्ञेय और नागार्जुन की कविताओं को आधुनिक संगीतबद्ध स्वर में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके लिए मुंबई से प्रतिष्ठित युगल कलाकार चिन्मयी त्रिपाठी और जोएल मुखर्जी आमंत्रित किए गए हैं।

सम्मान एवं पुरस्कार

इस वर्ष हिंदी मेला में 3 लाख रुपये से अधिक की पुरस्कार राशि दी जाएगी।

प्रमुख सम्मान इस प्रकार हैं-

 ‘प्रो. कल्याण लोढ़ा–लिली लोढ़ा सम्मान’ :

  प्रो. गोपेश्वर सिंह (दिल्ली विश्वविद्यालय)

  प्रो. दामोदर मिश्र (विद्यासागर विश्वविद्यालय, मिदनापुर)

 ‘माधव शुक्ल नाट्य सम्मान’ : वरिष्ठ रंगकर्मी अमिताभ श्रीवास्तव (दिल्ली)

 ‘युगल किशोर सुकुल पत्रकारिता सम्मान’ : पत्रकार किशन कालजयी

 ‘निर्मल वर्मा साहित्य सम्मान’ : सुश्री तसनीम खान

 ‘पंडित रामानंद द्विवेदी संस्कृत सम्मान’ : सौरिन मंडल, अमिता कोले, सरस्वती टुडू

वक्तव्य

भारतीय भाषा परिषद के वित्त सचिव घनश्याम सुगला ने कहा कि युवाओं के बीच साहित्य और संस्कृति के प्रति प्रेम बढ़ाने के लिए परिषद का सहयोग निरंतर रहेगा। वरिष्ठ लेखक शंभुनाथ ने कहा, “हिंदी सबका घर है और हिंदी मेला मानवता का उत्सव।”

प्रेस कॉन्फ्रेंस को मृत्युंजय श्रीवास्तव, अनीता राय, उत्तम ठाकुर और हंसराज ने भी संबोधित किया। आयोजन को सफल बनाने में सूर्य देव राय, रूपेश कुमार यादव, आशुतोष राउत, चंदन भगत, अनिल साह, कंचन भगत और फरहान अज़ीज़ का विशेष सहयोग रहा।

हिंदी मेला आज केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि हिंदी की अखंडता, भारतीय भाषाओं के आत्मसम्मान और युवाओं की सृजनात्मक चेतना का सशक्त मंच बन चुका है।

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