लखनऊ में कवयित्री कात्यायनी समेत बुद्धिजीवियों की हिरासत

लखनऊ में कवयित्री कात्यायनी और पत्रकार संजय श्रीवास्तव की हिरासत से यूपी सरकार घिरी। मजदूर आंदोलन से जुड़ी रिपोर्ट पर कार्रवाई ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए।

Apr 14, 2026 - 14:41
Apr 14, 2026 - 15:17
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लखनऊ में कवयित्री कात्यायनी समेत बुद्धिजीवियों की हिरासत
कवयित्री कात्यायनी और सत्यम वर्मा

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल, योगी सरकार घिरी

लखनऊ, 13 अप्रैल 2026। उत्तर प्रदेश में एक बार फिर पुलिसिया कार्रवाई ने लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस छेड़ दी है। राजधानी लखनऊ के हसनगंज थाना क्षेत्र में कवयित्री कात्यायनी, बुद्धिजीवी सत्यम वर्मा और वरिष्ठ पत्रकार संजय श्रीवास्तव को हिरासत में लिए जाने की घटना ने योगी सरकार की कार्यशैली पर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, हसनगंज थाना के एसएचओ और पुलिस टीम ने ‘जनचेतना’ पुस्तक प्रतिष्ठान पर पहुंचकर इन सभी को हिरासत में लिया। इतना ही नहीं, उनके मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए, जिससे पारदर्शिता पर और भी संदेह गहरा गया है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई नोएडा में चल रहे मजदूर आंदोलन से संबंधित रिपोर्टों को ‘मजदूर बिगुल’ के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करने के कारण की गई है। सवाल यह है कि क्या अब मजदूरों की आवाज उठाना भी अपराध बन गया है?

इस घटना की जानकारी मिलते ही जन संस्कृति मंच की लखनऊ इकाई की सचिव फरजाना महदी और आइसा के छात्र नेता शांतम निधि हसनगंज थाना पहुँचे और हिरासत में लिए गए लोगों से मुलाकात की। उनके अनुसार, फिलहाल उन्हें ‘पूछताछ’ के नाम पर थाने में बैठाया गया है, लेकिन आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। जन संस्कृति मंच और आइसा ने इस पूरी कार्रवाई को ‘लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन’ करार देते हुए कड़ा विरोध जताया है। संगठन का कहना है कि यह घटना स्पष्ट रूप से सरकार की असहिष्णुता और आलोचनात्मक आवाजों को दबाने की नीति को उजागर करती है।

सबसे बड़ा सवाल
क्या उत्तर प्रदेश में अब लेखन, पत्रकारिता और जनपक्षधर विचार रखना भी अपराध माना जाएगा?

राजनीतिक संदेश
यह घटना न सिर्फ पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है, बल्कि योगी सरकार की उस छवि को भी झटका देती है, जो ‘सुशासन’ और ‘कानून व्यवस्था’ के नाम पर स्थापित की गई थी।

साहित्यविद की माँग

  • पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जाँच हो।
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संवैधानिक संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

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गायत्री उपाध्याय गायत्री उपाध्याय एक शोधार्थी और पत्रकार हैं, जो डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर से मीडिया डिप्लोमेसी एवं अंतरराष्ट्रीय संबंध पर शोधरत हैं। आपने जनसंचार में स्नातकोत्तर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय और हिंदी साहित्य में स्नातक प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी, कोलकाता से शिक्षा प्राप्त की है। 2021 से ‘जागो’ में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत, आप सामाजिक, शैक्षिक और वैश्विक मुद्दों पर तथ्यपरक एवं विश्लेषणात्मक लेखन करती हैं।