चैत्र नवरात्र 2026: तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की आराधना से मिलेगा साहस, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद
चैत्र नवरात्र 2026 के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा का विशेष महत्व जानें। इस दिन आराधना से साहस, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
सागर, 20 मार्च 2026 । चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर 21 मार्च, शनिवार को तृतीया तिथि के साथ माता दुर्गा के तृतीय स्वरूप माँ चंद्रघंटा की आराधना की जाएगी। इस दिन भक्त पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से माँ की पूजा-अर्चना कर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।
माँ चंद्रघंटा का दिव्य स्वरूप
माँ चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है, जिससे उनका यह नाम पड़ा। दस भुजाओं वाली माँ विभिन्न शस्त्रों से सुसज्जित हैं और सिंह पर सवार होकर अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। उनके मुखमंडल पर करुणा, सौम्यता और दिव्य तेज का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
साधना और आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ चंद्रघंटा की आराधना से साधक का मन मणिपुर चक्र में स्थित होता है, जिससे आत्मिक शक्ति और अलौकिक ऊर्जा का संचार होता है। भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है और भय, तनाव एवं नकारात्मकता समाप्त होती है।
माँ का आशीर्वाद: जीवन में क्या मिलता है?
माँ चंद्रघंटा की पूजा से भक्तों को
- साहस और निर्भयता
- मानसिक शांति
- उत्तम स्वास्थ्य
- सुख और समृद्धि
- व्यक्तित्व में तेज और आकर्षण प्राप्त होता है। माँ के आशीर्वाद से जीवन की बाधाएं और पापों का नाश होता है।
पूजन मंत्र
“या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः।”
आस्था का संदेश
माँ चंद्रघंटा का यह स्वरूप हमें सिखाता है कि जीवन में साहस और शांति का संतुलन ही सच्ची शक्ति है। भक्ति, संयम और श्रद्धा के साथ किया गया साधन जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।
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