प्रधानमंत्री से ‘पुरुष आयोग’ गठन की माँग, सामाजिक न्याय मंत्रालय में शिकायत दर्ज
निर्दोष पुरुषों और उनके परिवारों के मानवाधिकार संरक्षण हेतु ‘पुरुष आयोग’ के गठन की माँग को लेकर मिर्जापुर निवासी ने सामाजिक न्याय मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराई है। मामला प्रक्रिया में।
नई दिल्ली/मिर्जापुर | देश में निर्दोष पुरुषों और उनके परिवारों के कथित उत्पीड़न का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जनपद निवासी जयचंद मौर्य ने भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कर ‘पुरुष आयोग (Men’s Commission)’ के गठन की माँग की है।
शिकायत को मंत्रालय द्वारा MOSJE/E/2025/0005378 पंजीकरण संख्या के अंतर्गत 01 दिसंबर 2025 को प्राप्त किया गया, जिस पर 18 दिसंबर 2025 को कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ होने की पुष्टि की गई है। वर्तमान में यह शिकायत ‘प्रक्रिया के तहत’ बताई जा रही है।
क्या है शिकायत का मूल तर्क?
शिकायतकर्ता का कहना है कि देश में महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य वर्गों के लिए अलग-अलग संवैधानिक व वैधानिक आयोग मौजूद हैं, लेकिन कुछ मामलों में कानूनों के कथित दुरुपयोग से निर्दोष पुरुष और उनके परिवार गंभीर मानसिक, सामाजिक और आर्थिक पीड़ा झेल रहे हैं, विशेष रूप से दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में, जहाँ वर्षों तक मुकदमे चलते हैं, भले ही अंततः आरोप सिद्ध न हों। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि माननीय न्यायालयों ने विभिन्न निर्णयों में कानूनों के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की है, जिससे निर्दोष व्यक्तियों को अनावश्यक आपराधिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ता है।
पुरुष आयोग से क्या अपेक्षा?
शिकायत में प्रस्तावित Men’s Commission के लिए निम्न भूमिकाएँ सुझाई गई हैं-
निर्दोष पुरुषों और उनके परिवारों की शिकायतों को सुनना, कानूनों के संभावित दुरुपयोग का अध्ययन करना, सरकार को संतुलित विधायी व नीतिगत सुझाव देना, समानता, न्याय और सामाजिक संतुलन को मजबूत करना। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यह माँग महिलाओं या किसी अन्य वर्ग के अधिकारों के विरोध में नहीं, बल्कि संविधान के ‘समान विधि संरक्षण (Equal Protection of Law)’ के सिद्धांत के अनुरूप है।
सरकारी स्तर पर स्थिति
इस शिकायत की जिम्मेदारी श्री मृत्युंजय शाह (Director), MSIJE-कानूनी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को सौंपी गई है। मंत्रालय का कार्यालय शास्त्री भवन, नई दिल्ली में स्थित है। फिलहाल सरकार की ओर से आयोग गठन को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन शिकायत का औपचारिक रूप से पंजीकरण और प्रक्रिया में लिया जाना इस विषय को नीति-स्तर पर चर्चा के दायरे में लाता है।
बढ़ती बहस
हाल के वर्षों में Men’s Rights, False Cases Debate, और Gender Neutral Laws जैसे मुद्दों पर सार्वजनिक विमर्श तेज हुआ है। यह शिकायत उसी व्यापक बहस का हिस्सा मानी जा रही है, जहाँ न्याय और संतुलन की माँग को केंद्र में रखा जा रहा है।
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