हिंदी मेला के पाँचवें दिन काव्य संगीत, लोकगीत और भावनृत्य का भव्य उत्सव
कोलकाता में आयोजित 31वें हिंदी मेले के पाँचवें दिन काव्य संगीत, लोकगीत और भाव नृत्य प्रतियोगिताओं के माध्यम से साहित्य, संगीत और नृत्य का शानदार संगम देखने को मिला।
हिंदी मेला के पाँचवें दिन कविताओं पर संगीत, लोकगीत और भावनृत्य का रंगारंग उत्सव
कोलकाता | 30 दिसंबर 2025 | 31वें हिंदी मेला के पाँचवें दिन भारतीय साहित्यिक-सांस्कृतिक परंपरा का अत्यंत जीवंत और भावनात्मक स्वरूप देखने को मिला। दिन भर चले कार्यक्रमों में काव्य संगीत, लोकगीत तथा भाव नृत्य (एकल व समूह) प्रतियोगिताओं के माध्यम से कविता, संगीत और नृत्य का ऐसा समन्वय प्रस्तुत हुआ, जिसने दर्शकों को कला की गहराई और सौंदर्य से जोड़ दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए सांस्कृतिक पुनर्निर्माण मिशन के संयुक्त महासचिव डॉ. राजेश मिश्र ने कहा कि हिंदी मेला किसी एक संस्था या व्यक्ति का आयोजन नहीं, बल्कि यह सामूहिक सांस्कृतिक चेतना का परिणाम है। उन्होंने कहा कि “आप सभी के सहयोग से यह सांस्कृतिक कारवां 31 वर्षों तक पहुँचा है और यह यात्रा आगे भी इसी सहभागिता से निरंतर चलती रहेगी।” निर्णायक ऋतेश पांडेय ने काव्य संगीत को हिंदी मेले की विशिष्ट पहचान बताते हुए कहा कि कविता जब सुरों से जुड़ती है तो वह केवल शब्द नहीं रहती, बल्कि संवेदना का सजीव अनुभव बन जाती है। प्रो. सुमिता चट्टोराज ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिंदी मेला केवल बंगाल का आयोजन नहीं, बल्कि यह पूरे भारत की भाषायी और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। वहीं डॉ. अनीता राय ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को रचनात्मक बनाते हैं और नई पीढ़ी को कला व साहित्य से जोड़ने का सशक्त माध्यम बनते हैं।
काव्य संगीत: कविता जब सुरों में ढल गई
काव्य संगीत प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने प्रसिद्ध हिंदी कवियों की रचनाओं को संगीतबद्ध कर प्रस्तुत किया। भाव, लय और शब्दों की सटीक संगति ने दर्शकों को गहरे स्तर पर प्रभावित किया।
शिखर सम्मान अरिश्ता प्रकाश (द बीएसएस स्कूल) को मिला।
प्रथम स्थान अजय शर्मा (सुरेंद्रनाथ सांध्य कॉलेज),
द्वितीय स्थान हर्षिता साव (सेंट ल्युक्स डे स्कूल),
तृतीय स्थान संयुक्त रूप से ऋणाशा रानी (केंद्रीय विद्यालय, बामनगाछी) एवं संगीता कुमारी (केंद्रीय विद्यालय, खड़गपुर) को प्रदान किया गया।
लोकगीत: लोकसंस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति
लोकगीत प्रतियोगिता में विभिन्न क्षेत्रों की लोकपरंपराओं की झलक देखने को मिली। ढोलक, मंजीरा और पारंपरिक गायन शैली ने पूरे वातावरण को लोक रंग में रंग दिया।
शिखर सम्मान ऐशानी पॉल (इंडस वैली वर्ल्ड स्कूल) को मिला।
प्रथम स्थान वैष्णवी सिंह एवं दल (अग्रसेन बालिका विद्यालय),
द्वितीय स्थान रौनक भट्टाचार्य (इंडस वैली वर्ल्ड स्कूल),
तृतीय स्थान अंशिता साव एवं दल (नारायणा स्कूल) को प्राप्त हुआ।
भाव नृत्य: भाव, कथ्य और देह-भाषा का संगम
भाव नृत्य प्रतियोगिता में नृत्य के माध्यम से कविता और गीतों की भावनात्मक व्याख्या प्रस्तुत की गई।
भाव नृत्य (एकल) में
शिखर सम्मान देवोस्मिता कुंडू (मणिशंकर कला केंद्र),
प्रथम स्थान स्नेहज मल्लिक,
द्वितीय स्थान महिमा केशरी,
तृतीय स्थान एकार्ना बंधु को मिला।
भाव नृत्य (समूह) में
शिखर सम्मान मणिशंकर कला केंद्र,
प्रथम स्थान विभाष डांस एकेडमी,
द्वितीय स्थान हाजीनगर आदर्श हिंदी बालिका विद्यालय,
तृतीय स्थान आदित्य अकादमी को प्रदान किया गया।
आयोजन और संचालन
कार्यक्रम का सफल एवं सधे हुए ढंग से संचालन अमरजीत पंडित, पंकज सिंह, रमाशंकर सिंह, सूर्य देव रॉय तथा अदिति दूबे ने किया। आयोजन को सफल बनाने में संजय दास, डॉ. विकास कुमार साव, प्रो. मंटू दास, डॉ. फूलचंद्र राम, आशुतोष कुमार राउत, विशाल कुमार साव, सत्यम पांडेय सहित अनेक सहयोगियों की उल्लेखनीय भूमिका रही। अंत में सुरेश शॉ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
What's Your Reaction?

